भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब रोडवेज पनबस व पीआरटीसी कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। सूबा प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि केंद्र सरकार की मजदूर और जनविरोधी नीतियों, बिजली एक्ट, बीज संशोधन बिल, लेबर कोड और निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल के तहत पंजाब में भी रोष प्रदर्शन किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा बड़ी संख्या में निजी बसें विभाग में उतारने से युवाओं के रोजगार पर संकट खड़ा हो रहा है और सरकारी परिवहन व्यवस्था को कमजोर कर रहा है। विरोध करने वाले कर्मचारियों को घरों से उठाकर झूठे मामलों में फंसाया गया और गंभीर धाराओं के तहत जेलों में बंद किया गया, जबकि कर्मचारियों का कसूर केवल अपने विभाग को निजीकरण से बचाने के लिए आवाज उठाना था। कर्मचारियों को पक्का करने, ठेकेदारी प्रथा खत्म करने, वेतन समान करने और सरकारी बसें बढ़ाने जैसे मुद्दों पर सरकार अपने वादों से पीछे हट गई है। हालांकि यूनियन के हड़ताल के चलते दो दिनों से बसें नहीं चलीं। इसके दबाव के बाद सरकार और विभाग के उच्च अधिकारियों ने यूनियन नेताओं के साथ बैठक कर जेल में बंद साथियों की रिहाई, रिहा हुए कर्मचारियों को दोबारा ड्यूटी पर लेने और मानी गई मांगों को लागू करने का भरोसा दिया। इस सहमति के बाद यूनियन ने हड़ताल और धरना स्थगित कर दिया, जिसके बाद पनबस व पीआरटीसी बसों की चक्का जाम हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है। यूनियन के प्रदेश सचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने बताया कि साथियों की रिहाई की मांग उठाने पर और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे साफ है कि सरकार आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो पूरे पंजाब की यूनियनों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा और बसों का चक्का जाम लगातार जारी रहेगा।


