हनुमानगढ़ जिले में बढ़ते तापमान के बीच रबी फसलों, विशेषकर गेहूं को सिंचाई की सख्त आवश्यकता है। हालांकि, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में 15 मार्च को सिंचाई पानी का रेगुलेशन समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद 20 मार्च से 45 दिवसीय क्लोजर शुरू होगा। इससे गेहूं की फसल के पकाव पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 20 से 25 फरवरी तक अधिकतम तापमान 27 से 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मार्च में तापमान में और वृद्धि की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल को मार्च में कम से कम 2 सिंचाई की आवश्यकता होती है, अन्यथा उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। 2 लाख 39 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई
इस साल जिले में लगभग 6.50 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई है, जिसमें से 2 लाख 39 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है। वर्तमान में, IGNP को तीन समूहों में विभाजित कर एक-एक समूह की नहरों में पानी चलाया जा रहा है, जिससे खेतों तक लगभग 25 दिन के अंतराल पर पानी पहुंच रहा है। 15 मार्च के बाद केवल पेयजल आपूर्ति
नौरंगदेसर वितरिका (एनडीआर) और रावतसर ब्रांच में 25 फरवरी को ही पानी की आपूर्ति बंद हो जाएगी। इसके बाद अनूपगढ़ और सूरतगढ़ शाखा सहित अन्य नहरों को 15 मार्च तक चलाया जाएगा। 15 मार्च के बाद केवल पेयजल आपूर्ति की जाएगी।
क्लोजर से पहले गांवों और शहरों की डिग्गियों में पानी भरा जाएगा, लेकिन किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा। जिन किसानों के पास ट्यूबवेल की सुविधा नहीं है, उन्हें सर्वाधिक नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने पकाव के समय एक अतिरिक्त बारी पानी देने की मांग की है, उनका कहना है कि मार्च में सिंचाई न होने पर गेहूं की पैदावार पर बड़ा असर पड़ेगा।


