नूंह के फिरोजपुर झिरका में चल रहे तीन दिवसीय तब्लीगी जलसे का आज दूसरा दिन है। पहले दिन जहां कार्यक्रम में 50 से 60 हजार लोग पहुंचे थे तो वहीं दूसरे दिन जलसा सुनने के लिए करीब 5 से 6 लाख लोग पहुंचे। मुस्लिम समुदाय के लोग हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और दिल्ली सहित कई राज्यों से पहुंच रहे हैं। लगातार यह संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा आज मीडिया की एंट्री पर बैन लगा दिया गया है। तब्लीगी जलसा में भाजपा के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह भी पहुंचे, जिसमें उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। मुसलमान को मंदिर का और हिंदुओं को मस्जिद का सम्मान करना चाहिए। जलसे के लिए करीब 21 एकड़ से अधिक भूमि में टेंट लगाया गया है। तो वहीं 100 एकड़ भूमि में शौचालय, पार्किंग, वजू खाना, मेडिकल से लेकर तमाम इंतजाम किए गए हैं। बाहर की व्यवस्था को देखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए है, तो वहीं करीब 5000 हजार से ज्यादा तब्लीगी जमात के वालंटियर व्यवस्था को सुचारू रूप से अंजाम दे रहे हैं। अंतिम दिन जब मौलाना साद साहब की दुआ होगी तो करीब 10 से 15 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस्लाम देश से बगावत की इजाजत नहीं देता- मौलाना साद
हजरत मौलाना साद ने कहा कि हम भारत में रहते हैं और यहां के कानून हमें मानने होंगे। सच्चा मोमिन ऐसा कोई काम नहीं करता जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे और जो कानून के खिलाफ हो।
वह फिरोजपुर झिरका में आयोजित तबलीगी जलसा में पहुंचे लोगों को संबोधित कर रहे थे। आयोजन के दूसरे दिन रविवार की सुबह के संबोधन में मौलाना साद ने कहा, ‘इस्लाम देश से बगावत की इजाजत नहीं देता और इस्लाम को मानने वाले लोग गलत काम नहीं कर सकते। इसलिए मोमिनों को गलत काम छोड़कर सही राह पर चलना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सच्चे मुस्लिम को पांचों वक्त की नमाज पाबंदी के साथ अता करनी चाहिए और अपने बच्चों को मस्जिद जरूर लेकर जाना चाहिए। विशेष रूप से घर की बेटियों और महिलाओं को इस्लाम की शिक्षा देनी चाहिए। वह बोले, ‘नमाज अता नहीं करने पर मोमिन को किसी भी सूरत में माफी नहीं है। चलने फिरने में बीमार मोमिन को बैठकर नमाज अता करनी चाहिए। जान बूझकर एक नमाज छोडने पर दो करोड़ 88 लाख वर्ष जहन्नुम में जलना पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि व्यक्ति को चाहिए एक दूसरे के सुख दुख में काम आए। मीडिया की एंट्री पर बैन लगा
मौलाना शाद साहब अपने मां-बाप की नाफरमानी करने वालों को खुदा कभी माफ नहीं करता। ऐसा करने वाले लोग अल्लाह की नजरों में बड़े गुनाहगार होते हैं। मोमिन को चाहिए कि वो नबी के बताए गए तरीकों पर जिंदगी गुजारे। आयोजन के दूसरे दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम जलसा में हिस्सा लेने पहुंचे। जलसा में आने वालों की सेवा के लिए स्थानीय मुस्लिमों ने जगह-जगह पानी व खाने का बंदोबस्त कर रखा है। हालांकि जलसा कमेटी के सदस्यों द्वारा कार्यक्रम में अब मीडिया की एंट्री पर बैन लगा दिया गया है। तब्लीगी जमात जलसा के मीडिया प्रभारी अख्तर अल्वी ने कहा कि 4 किलोमीटर एरिया जलसा के लिए कवर किया है। जलपान पार्किंग हर तरह की व्यवस्था की है। पिछले 4 महीने से तैयारी कर रहे थे, बड़ी संख्या में लोग यहां पर आ रहे हैं । पहले दिन मौलाना हजरत साद ने लोगों को बुराइयों को छोड़ अच्छाई के रास्ते पर चलने की बात कहने के साथ मुसलमानों को दीनी तालीम दी हैं। मौलाना साद साहब ने कहा कि जो मुस्लिम जमीनों और रास्तों पर अवैध कब्जा करता है, उसकी दुआ कभी कबूल नहीं होती। मौलाना साद ने कहा कि इस्लाम जानना इस्लाम नहीं है बल्कि अमल करना इस्लाम है। तकदीर पर ईमान लाना जरूरी है। ईमान केवल दिल में रखने की चीज नहीं है बल्कि जाहिर करने का है। मुसलमान की पहचान नबी मुहम्मद के हुलिया से होती है। अगर मुसलमान जकात देने वाला बन जाए तो दुनिया से गरीबी खत्म हो जाएगी। अगर हर आलिम, आलिम बन जाए तो दुनिया से जहालत खत्म हो जाएगी। अभी तक इस्लाम किताब में है, इसे जिंदगी में लाओ। किताब का अमल इस्लाम नहीं है बल्कि जिंदगी को इस्लाम के तरीके से गुजारना इस्लाम है।


