राजस्थान के विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए चल रही व्यावसायिक शिक्षा के शिक्षक खुद बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। स्कूलों में संविदा पर लगने वाले इन शिक्षकों को 20 से 22 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। यह मानदेय भी उन्हें कई महीनों से नहीं मिला है। यही नहीं प्रदेश में 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा चल रही है, लेकिन 2081 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। बिना शिक्षक के यहां पढाई कर रहे विद्यार्थियों को का भविष्य भी अंधकारमय है। अब सरकार ने बजट में 500 नए स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने की घोषणा की है। जब पहले से जिन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है, वहां इस शिक्षा का बेहाल है तो नए स्कूलों में शिक्षक कहां से आएंगे। इसको देखते हुए प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षकों ने हरियाणा मॉडल पर यहां शिक्षकों की भर्ती की मांग उठाई है। व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन गर्ग और संरक्षक कमलेश कुमार का कहना है कि राजस्थान में हरियाणा मॉडल लागू करके व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत किया जाए। व्यावसायिक शिक्षकों में जॉब को लेकर असुरक्षा की भावना रहेगी तो इसका असर विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। इसलिए सरकार को राजस्थान में नियमित भर्ती करनी चाहिए।
भर्ती के लिए टेंडर किया पर भ्रष्टाचार की शिकायतों पर निरस्त: प्रदेश में 4019 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है। इसमें अलग अलग ट्रेड (विषय) में करीब 3 हजार शिक्षक कार्यरत है। इन स्कूलों में से 2081 स्कूलों में कोई व्यावसायिक शिक्षक नहीं है। क्योंकि पिछले दिनों यहां शिक्षक लगाने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जो टेंडर जारी किया था। वह अनियमितता व भ्रष्टाचार की शिकायतों के चलते निरस्त कर दिया गया था। अभी फिर से जारी नहीं हुआ। यहां 9वीं से 12वीं कक्षा तक 3.50 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत है। यहां प्रमुख रूप से हेल्थ केयर, ब्यूटी वैलनेस, इलेक्ट्रिक एंड हार्डवेयर, ऑटोमोटिव, आईटी, एग्रीकल्चर, सिक्यूरिटी, मल्टीमीडिया, ट्यूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग सहित कई ट्रेड की पढ़ाई हो रही है। यहां निजी फर्म संविदा पर लगा रही
यहां स्कूल शिक्षा परिषद शिक्षक लगाने के लिए टेंडर जारी करता है। इसके बाद फर्म के जरिए शिक्षक लगाए जाते हैं। जो पूरी तरह से संविदा पर होते हैं। उनको 20 से 22 हजार रुपए प्रतिमाह फिक्स वेतन दिया जाता है। उन्हें कभी भी नौकरी से हटाया जा सकता है। मानदेय बढ़ोतरी का कोई प्रावधान नहीं है। यहां मातृत्व अवकाश नहीं मिलता है। यहां जॉब सिक्यूरिटी नहीं है। हरियाणा: विभाग खुद करता है भर्ती
हरियाणा में विभाग खुद शिक्षकों की भर्ती करता है। वहां वेतन 38 हजार से अधिक मिलता है। शिक्षकों को 60 वर्ष का होने तक जॉब सिक्यूरिटी मिलती है। हर साल वेतन में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है। वहां सरकारी कर्मचारी की तरह अवकाश की सुविधाएं मिलती है और मातृत्व अवकाश भी मिलता है।


