हरियाणा CID विवादों में घिरी:नाम-पावर को लेकर उठे सवाल, CM नायब सैनी तक पहुंची शिकायत; कुछ दिन पहले नया चीफ लगाया था

हरियाणा में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) का गठन ही विवादों में घिर गया है। इसको लेकर एक शिकायत CM नायब सैनी तक पहुंची है। जिसमें दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने हरियाणा के पुलिस कानून (2007) में सीआईडी नाम का कोई जिक्र नहीं है। यह भी कहा गया है कि CID को इन्वेस्टिगेशन का अधिकार ही नहीं है तो फिर उसके नाम में इसे शामिल क्यों किया गया है। सरकार ने हाल ही में फरीदाबाद के पूर्व पुलिस कमिश्नर सौरभ सिंह को CID का चीफ लगाया है। सौरभ सिंह 1993 बैच के IPS अधिकारी हैं। सरकार में यह विभाग काफी अहम माना जाता है। इसी वजह से CM नायब सैनी ने इसे अपने पास रखा है। CID को लेकर पैदा हुए विवाद से जुड़ी 3 अहम बातें.. 1. SC के आदेश पर हरियाणा में 16 साल पहले बना पुलिस कानून
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं कानूनी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा पुलिस एक्ट (कानून), 2007 को‌ लागू हुए‌ 16 साल से ऊपर हो गए हैं। सितंबर 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश में पुलिस सुधार सुनिश्चित करने के लिए पंजाब के तत्कालीन सीएम प्रकाश सिंह बादल बनाम भारत सरकार एवं अन्य नामक केस में ऐतिहासिक निर्णय दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा समेत देश की सभी प्रदेश सरकारों को‌‌ 6 निर्देशों के तहत ब्रिटिश शासनकाल के दौरान से‌ लागू पुलिस एक्ट,1861 को समाप्त करने को कहा था। इसके अलावा विधानसभा में प्रदेश का नया पुलिस कानून बनाने को कहा था। जिसके बाद इसे हरियाणा में भी बनाया गया। 2. CID के बजाय पुलिस लॉ में सिर्फ 2 ही विंग
एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा पुलिस कानून, 2007‌ में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट नाम का कहीं उल्लेख नहीं है, इसके स्थान पर पुलिस कानून की धारा 16 में प्रदेश पुलिस में स्टेट इंटेलिजेंस विंग (SIV) और स्टेट क्राइम इन्वेस्टिगेशन (SCI) विंग बनाने की बात कही गई है। पुलिस कानून के अनुसार ये दोनों कोई अलग विभाग नहीं बल्कि राज्य पुलिस संगठन के ही दो अलग-अलग विंग होंगे। वर्तमान में इंटेलिजेंस विंग का काम CID के जरिए कराया जा रहा है। 3. पुलिस कानून में इन 2 विंग को दिए काम
हरियाणा पुलिस कानून की धारा 16 अनुसार स्टेट इंटेलिजेंस विंग का कार्य इंटेलिजेंस का संग्रहण, समाकलन, विश्लेषण एवं उपयुक्त (सीमित) प्रचारण करना है। वहीं स्टेट क्राइम इन्वेस्टिगेशन विंग का कार्य आपराधिक आसूचना (क्रिमिनल इंटेलिजेंस) का संग्रहण, समाकलन और विश्लेषण करना है। इसके साथ साथ यह विंग गंभीर और जघन्य अपराधों एवं जिनका अंतरराज्यीय, अंतर-जिला, बहु शाखन, मुख्य आर्थिक अपराध, साइबर अपराध एवं अन्य गंभीर अपराधों के संबंध में जांच करना शामिल है। अंग्रेजों ने बनाई थी सीआईडी
हेमंत ने बताया कि हमारे देश में सीआईडी की स्थापना अंग्रेजी शासनकाल दौरान हुई थी, हालांकि वर्तमान में देश के सभी राज्यों में इसकी संरचना एवं कार्यकलाप एक सामान नहीं हैं। हरियाणा पुलिस कानून, 2007 की धारा 16 अनुसार प्रदेश सीआईडी के पास न तो कानूनन क्रिमिनल इंटेलिजेंस है तो न ही क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन की शक्ति है। यह शक्तियां स्टेट क्राइम इन्वेस्टिगेशन विंग के पास निहित है, इसलिए सीआईडी का वर्तमान अंग्रेजी नाम क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन न्यायोचित नहीं है। सीएम सैनी के पास है सीआईडी डिपार्टमेंट
हरियाणा सरकार के वर्ष 2024 में हुए विभागों के बंटवारे में CID को CM नायब सैनी के पास रखा गया है। इसको हिंदी में तो गुप्तचर विभाग बताया गया है लेकिन अंग्रेजी में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन बताया गया है। रोचक बात यह है कि सीआईडी अर्थात गुप्तचर विभाग किसी भी आपराधिक मामले में आधिकारिक तौर पर क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन नहीं करता है। हरियाणा सरकार कार्य (आवंटन) नियमावली 1974 में आज तक सीआईडी को अलग विभाग के रूप में नहीं बल्कि प्रदेश के गृह विभाग के अंतर्गत ही दर्शाया गया है। CID चीफ हैं सौरभ सिंह
22 दिंसबर 2024 को सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार सौरभ सिंह 1998 बैच के IPS अधिकारी को सीआईडी ​​चीफ बनाया गया। सौरभ सिंह मूल रूप से लखनऊ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अपने 26 साल के कार्यकाल के दौरान सौरभ सिंह फतेहाबाद, भिवानी, झज्जर, सिरसा, रोहतक और जींद में एसपी और गुरुग्राम में पुलिस उपायुक्त और यातायात में पुलिस अधीक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। फिलहाल फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर पद पर तैनात थे। करीब एक महीने पहले नवंबर में उन्हें फरीदाबाद का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया था। अब उन्हें सीआईडी ​​चीफ नियुक्त किया गया है।

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