छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा ब्लॉक में ग्राम कसावाही की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। मां लक्ष्मी महिला समूह की सदस्य पिछले पांच सालों से जैविक खाद का निर्माण कर रही हैं। इन महिलाओं ने बिना किसी सरकारी सहायता के सिर्फ प्रशिक्षण लेकर यह काम शुरू किया। वे गोमूत्र, नीम के पत्ते और अन्य प्राकृतिक सामग्री से जैविक खाद तैयार करती हैं। रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में तैयार की जा रही इस खाद को बड़ी-बड़ी कंपनियां भी खरीद रही हैं। जैविक खाद लेकर खेती कर रहे किसान गांव के किसान भी अब इनसे जैविक खाद लेकर खेती कर रहे हैं। महिलाएं इस काम से न केवल अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं। वे लोगों को जागरूक कर रही हैं कि वे भी इस तरह से रोजगार शुरू कर सकते हैं। किसानों को रासायनिक खाद से मिलेगी मुक्ति शासन-प्रशासन की ओर से कोई मदद न मिलने के बावजूद इन महिलाओं ने मेहनत और लगन से सफलता हासिल की है। उनका यह प्रयास किसानों को रासायनिक खाद से मुक्ति दिलाने में मददगार साबित हो रहा है।


