हाईकोर्ट के फैसले से 5वीं-8वीं बोर्ड अब अनिवार्य नहीं:लेकिन सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल परीक्षा में लेगा भाग, शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया

छत्तीसगढ़ के कई निजी स्कूलों में इस साल 5वीं और 8वीं कक्षा की परीक्षाएं केंद्रीकृत तरीके से आयोजित नहीं की जाएंगी। लेकिन सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल बोर्ड परीक्षा में भाग लेगा। स्कूल प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। दरअसल, हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नया आदेश जारी कर दिया है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि, प्राइवेट स्कूलों के छात्रों के लिए यह परीक्षा अब अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि, जो निजी स्कूल या छात्र इस परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें यह विकल्प मिलेगा। शैक्षणिक गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा निर्णय- सचिव सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल देवेंद्र नगर रायपुर के सचिव संजय जोशी ने कहा कि, परीक्षा व्यक्ति के पूरे जीवन का आधार है। इससे भागने से छात्र कमजोर हो जाएगा। परीक्षा तो विद्यार्थियों की मेहनत और उनकी शैक्षणिक प्रतिभा का प्रदर्शन है। इसीलिए पूरे उत्साह और आनंद के साथ हम 5वीं/8वीं बोर्ड परीक्षा का स्वागत करते हैं। यह शालाओं की शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के क्षेत्र में एक बड़ा निर्णय है। क्या है पूरा मामला ? 26 नवंबर 2024 को राज्य सरकार ने 5वीं और 8वीं की परीक्षाओं को केंद्रीकृत करने का फैसला लिया था। जिसके तहत सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक समान प्रश्नपत्र और समय-सारणी के आधार पर परीक्षा होनी थी। 3 दिसंबर 2024 को स्कूल शिक्षा विभाग ने इस फैसले को लागू करने के लिए आदेश जारी किया था। लेकिन, निजी स्कूल प्रबंधन और पालक संघ ने इस फैसले का विरोध किया और हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। उनका कहना था कि वे उन किताबों से छात्रों को नहीं पढ़ा रहे हैं, जिनके आधार पर परीक्षा ली जानी थी। इसके अलावा, सत्र के बीच में परीक्षा का पैटर्न बदलने से छात्रों को परेशानी होती। हाईकोर्ट का फैसला और नया आदेश 3 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि सरकार निजी स्कूलों पर केंद्रीकृत परीक्षा को अनिवार्य नहीं कर सकती। इसके बाद, 6 मार्च 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर दिया, जिसमें कहा गया कि इस फैसले का असर पहले यह परीक्षा कभी जिला स्तर पर तो कभी स्कूल स्तर पर आयोजित की जाती थी, जिससे एकरूपता नहीं थी। सरकार का मानना था कि केंद्रीकृत परीक्षा से छात्रों का मूल्यांकन बेहतर तरीके से हो सकेगा। लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी स्कूलों पर इसे अनिवार्य नहीं किया जाएगा।

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