मोरहाबादी मैदान के पास दुकानदारों को जगह नहीं देने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में सुनवाई हुई। नगर निगम की ओर से बताया गया कि अवमानना दाखिल करने वाले 27 लोगों को मोरहाबादी मैदान के बिजली आफिस के पास जगह दे दी गई है। इसके बाद अदालत ने अवमानना याचिका को निष्पादित कर दिया। इस मामले में वर्ष 2023 में अदालत ने हटाए गए दुकानदारों को दूसरी जगह उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। इस आदेश का पालन नहीं करने पर अवमानना दाखिल की गई थी। हालांकि प्रार्थियों की ओर से कम जगह होने और अन्य को जगह नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया। इस पर अदालत ने स्टेट वेंडर ग्रिवांस कमेटी के यहां अपना पक्ष रखने को कहा है। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने अदालत को बताया कि 49 दुकानदारों ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की थी। निगम की ओर से जांच के बाद 27 लोगों को जगह दी गई है। 17 लोगों की ओर से न तो वेंडर प्रमाण पत्र और न ही ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध कराया गया, जिससे यह साबित हो सके कि वह भी दुकान चलाते हैं। ऐसा कहते हुए निगम की ओर से उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया है, जबकि दो ने आवेदन ही नहीं भरा था। रांची की खराब सड़कों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब रांची | रांची शहर के संपर्क व आंतरिक सड़कों की मरम्मत के लिए दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई गुरुवार को हुई। इस दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता शुभम कटारूका ने अदालत को बताया कि रांची की कई सड़कें मामूली बारिश में भी तालाब बन जा रही हैं। तपोवन मंदिर और सेवा सदन अस्पताल के सामने की सड़क के पास की सड़क पर पानी भर जाता है। इस कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। वहीं अदालत ने कोर्ट में जमा की गई रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि राज्य सरकार द्वारा मरम्मत का दावा और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की रिपोर्ट परस्पर विरोधाभासी हैं। डालसा की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जिन सड़कों की बात की गई है। वे अत्यंत खराब स्थिति में हैं और उनकी शीघ्र मरम्मत काफी जरूरी है। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई।


