सीकर में हाईकोर्ट जस्टिस उमाशंकर व्यास ने कहा- एडवोकेट्स की तरफ ज्यूडिशियल ऑफिसर्स भी स्ट्रेस में हैं। वो भी टारगेटेड हैं, क्योंकि कोई भी ऑफिसर तनाव में या दबाव में नहीं रहना चाहता। उनसे रोज ऑर्डरशीट अपलोड करवाई जा रही है कि पूरे दिन में क्या किया? अब जो परिस्थिति है, उसको हम बदल नहीं सकते। लेकिन वकीलों से आग्रह है कि उनकी (ज्यूडिशियल ऑफिसर्स) समस्या को समझकर पहले की तरह पुटइट करें। उन्होंने कहा- ऑफिसर्स से भी रिक्वेस्ट है कि जब तक बार का पॉजिटिव सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक मामलों का डिस्पोजल नहीं होगा। आज नहीं तो कल 2 दिन की तारीख दे दो, 4 दिन की तारीख दे दो, ऑफिसर्स भी कॉपरेट करते हैं। उन्होंने कहा- न स्टेट गवर्नमेंट बजट दे रही है और न ही सेंटर गवर्नमेंट। अभी तक सब कागजों में चल रहा है। हाईकोर्ट जज उमाशंकर व्यास मंगलवार को सीकर में बार एसोसिएशन के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में जज उमाशंकर व्यास ने कहा- सीकर में कोर्ट के नए भवन में भी भविष्य को देखते हुए पर्याप्त जगह नहीं है। हाईकोर्ट प्रशासन को तो अब हम कुछ नहीं कह सकते, लेकिन नए भवन में भविष्य में विस्तार की संभावना नहीं है। रात को भी फाइल लेकर बैठते ज्यूडिशियल ऑफिसर
हाईकोर्ट जज उमाशंकर व्यास ने कहा- सामान्य रूप से केस ट्रायल को खत्म नहीं कर सकते। कोई केस है तो एक गवाह के बयान होते हैं। फिर क्रॉस एग्जामिन होता है। इसके बाद एक पूरी प्रक्रिया होती है। ऑफिसर समय दे रहे हैं, लेकिन उनकी लिमिटेशन है। हम सब साथ बैठते हैं, एक ही परिवार जैसे हैं। एक-दूसरे की समस्याएं भी देख रहे हैं। ज्यूडिशियल ऑफिसर दिनभर काम करके रात को भी फाइल लेकर बैठ जाता है। एडवोकेट्स की पर्सनल लाइफ और सोशल लाइफ भी
हाईकोर्ट जज उमाशंकर व्यास ने कहा- एडवोकेट्स की अलग समस्याएं हैं। उनकी पर्सनल लाइफ और सोशल लाइफ भी है। उनकी सामाजिक जिम्मेदारियां भी हैं और उन्हें एक क्लाइंट से 3 घंटे तक प्रासंगिक व अप्रासंगिक बातें सुननी पड़ती हैं। नहीं तो वो भाग जाता है। बार को कोर्ट से अलग नहीं देख सकते, क्योंकि जब तक बार की प्रभावी उपस्थिति नहीं हो, तब तक न्याय देना संभव नहीं है। न्यायिक अधिकारियों की तरह एडवोकेट्स के लिए भी न्यूनतम आवश्यकताएं होना जरूरी हैं। 5 साल बाद फिर शिफ्टिंग की समस्या आएगी
हाईकोर्ट जज उमाशंकर व्यास ने कहा- सीकर बार का नया भवन अभी अधूरा है। जब ये मामला मेरे सामने आया तो हाईकोर्ट प्रशासन में समाधान की संभावनाएं तलाशीं। लेकिन बहुत ज्यादा खुश होने की बात नहीं है, क्योंकि न तो स्टेट गवर्नमेंट बजट दे रही है और न ही सेंटर गवर्नमेंट, इसलिए अभी तक सब कागजों में चल रहा है। उन्होंने कहा- कोशिश है कि चीफ जस्टिस से मिलकर सुधार के प्रयास करेंगे। जब तक इसका फॉलोअप नहीं किया जाएगा, तब तक कोई प्रोग्रेस नहीं होनी है। नए भवन में पर्याप्त जगह होनी चाहिए नहीं तो 5 साल बाद फिर से शिफ्टिंग की समस्या आएगी। नए भवन में एडवोकेट्स, क्लाइंट्स, विटनेस के बैठने और गाड़ी पार्क करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होनी जरूरी है। वकीलों के चैंबर्स और ऑफिस के लिए भूमि आवंटन पर सहयोग
जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने नए कोर्ट परिसर में वकीलों के चैंबर्स और ऑफिस के लिए भूमि आवंटन में प्रशासन के स्तर पर हरसंभव सहयोग देने की बात कही। बार एसोसिएशन अध्यक्ष दामोदर प्रसाद माटोलिया ने कहा- वकील हितों के लिए तथा वकीलों की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहूंगा। प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों से कॉर्डिनेट कर नई कोर्ट बिल्डिंग में अधिक से अधिक चेंबर बनवाए जाएंगे। एसोसिएशन के सीनियर एडवोकेट भागीरथ सिंह जाखड़ व मुकुंद सिंह ने नए कोर्ट कैंपस में वकीलों के चैंबर्स व कार्यालय के भूमि और बजट की मांग उठाई। बार एसोसिएशन चुनावों की चुनाव संचालन समिति सदस्य पुरुषोतम शर्मा, सागर मल धायल और जगदीश भारती का स्वागत किया गया। महासचिव विजय कुमार शर्मा ने आभार जताया। संचालन सीनियर एडवोकेट राजेंद्र शर्मा ने किया। नई कार्यकारिणी को दिलाई शपथ
सीकर बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह एसोसिएशन के सभागार में हुआ। मुख्य अतिथि उमाशंकर व्यास रहे। जिला जज राजेंद्र कुमार टूटेजा व जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा विशिष्ट अतिथि थे। अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दामोदर प्रसाद माटोलिया ने की। नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने अतिथियों का सम्मान किया। हाईकोर्ट जज उमाशंकर व्यास ने अध्यक्ष दामोदर प्रसाद माटोलिया, महासचिव विजय कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष देवी सिंह सेवदा, संयुक्त सचिव किशोर सिंह बिजारणियां, कोषाध्यक्ष सुनिता सांई, पुस्तकालय सचिव जयपाल सिंह ओलखा, संयुक्त पुस्तकालय सचिव अनिल कुमार भामू, सामाजिक सचिव राजपाल कुमावत, कार्यकारिणी सदस्य भगवान सिंह घायल, भेभाराम गुर्जर, भींवाराम मील, श्यामसुंदर पटेल, गिरधारी लाल तथा सदस्य मोहन लाल चिरानिया, इस्लाउदीन गौरी को शपथ दिलाई।


