हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने की याचिका खारिज की:जालोर के भाद्राजून थाने का मामला, पुलिस पेश कर चुकी है चालान

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने जालोर के भद्राजून थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले की एफआईआर निरस्त करने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की एकल पीठ ने दिलीप और भीमा राम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद संबंधित अदालत में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है। जालोर जिले के भाद्राजून में भोरडा निवासी दिलीप (20) और भीमा राम (55) के खिलाफ पुलिस थाना भद्राजून में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें आरोपियों पर एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी मुख्य मांग इस एफआईआर और उसके आधार पर चल रही कानूनी कार्यवाही को पूरी तरह से निरस्त करने की थी। याचिकाकर्ता पक्ष से दो सुनवाई में गैरहाजिर
सुनवाई के दौरान 10 फरवरी को यह देखा गया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कोई भी वकील कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। इससे पहले हुई सुनवाई पर भी याचिकाकर्ता पक्ष से कोई हाजिर नहीं था। दूसरी ओर सरकार की ओर से लोक अभियोजक विक्रम राजपुरोहित व एडवोकेट निखिल भंडारी ने पक्ष रखा। पुलिस की तथ्यात्मक रिपोर्ट और फैसला
एडवोकेट भंडारी ने कोर्ट के समक्ष 9 फरवरी को तैयार की गई तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के माध्यम से कोर्ट को अवगत कराया गया कि पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच पूरी कर ली है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस पहले ही इस मामले में चालान पेश कर चुकी है। कोर्ट ने अपने फैसले में मुख्य रूप से निम्नलिखित निर्देश दिए:
याचिका का निस्तारण: चूंकि पुलिस जांच के बाद चालान पेश कर चुकी है, इसलिए कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की इस विविध याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। प्रस्तुतीकरण की स्वतंत्रता: हालांकि याचिका खारिज कर दी गई, लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह विकल्प दिया कि यदि वे उचित समझें, तो अपनी बात या पक्ष रखने के लिए संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक या जांच अधिकारी के समक्ष अपना री-प्रेजेंटशन पेश कर सकते हैं।

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