भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके में 5 वर्षीय मासूम बच्ची से रेप और हत्या के मामले में दोषी अतुल निहाले को दी गई तिहरी फांसी की सजा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है। आरोपी के परिजनों ने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। इसके बाद जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की मुख्य पीठ ने शुक्रवार को यह अहम निर्णय सुनाया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की डबल बेंच ने इस जघन्य अपराध को “दुर्लभतम मामलों” की श्रेणी में रखते हुए कहा कि यह ऐसा अमानवीय कृत्य है, जिसकी भयावहता शब्दों में बयान नहीं की जा सकती। डबल बेंच ने फैसले में कहा कि आरोपी अतुल निहाले ने एक निहायत ही अमानवीय और बर्बर अपराध को अंजाम दिया। अदालत के मुताबिक, आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म के दौरान उसके निजी अंगों पर चाकू से कई बार वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। “कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है”
अदालत ने कहा कि पांच साल की बच्ची ने अपने अंतिम क्षणों में जिस असहनीय पीड़ा को सहा, उसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। दुष्कर्म के दौरान उसकी बेबसी और दर्द की कल्पना मात्र से ही आत्मा सिहर उठती है। यही कारण है कि यह मामला सामान्य दंड से कहीं आगे जाकर मृत्युदंड की मांग करता है। हत्या के बाद भी क्रूरता जारी रही
कोर्ट ने यह भी गंभीरता से नोट किया कि बच्ची की मौत के बाद आरोपी ने उसके शव को तीन दिनों तक अपने घर की पानी की टंकी में छिपाकर रखा। अदालत ने इसे आरोपी की मानसिक क्रूरता और अपराध की भयावहता का प्रमाण माना। मजबूत सबूतों पर टिका फैसला
राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिव्या शुक्ला ने मामले की पैरवी की। हाई कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम से लेकर आरोपी की भूमिका तक, साक्ष्यों की एक मजबूत और अटूट शृंखला पेश की है। इसी आधार पर निचली अदालत के फैसले में किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं पाई गई। छह महीने में सुनाया गया था फैसला
18 मार्च 2025 को भोपाल की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने महज छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उस समय टिप्पणी की थी कि यदि मृत्युदंड से भी कठोर कोई सजा होती, तो आरोपी उसी का हकदार होता। बीएनएस लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह पहली फांसी की सजा थी। हाई कोर्ट के इस फैसले के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि मासूमों के खिलाफ किए गए ऐसे जघन्य अपराधों पर न्यायपालिका कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। यह मध्य प्रदेश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत पहला तिहरा मृत्युदंड का मामला था। आरोपी अतुल निहाले (30 वर्ष) मजदूरी करता था। अदालत ने उसे तीन अलग-अलग अपराधों – अपहरण, बलात्कार और हत्या के लिए मृत्युदंड दिया। जिसे “तिहरा मृत्युदंड” कहा गया है। मां और बहन को साक्ष्य छिपाने के आरोप में सजा
अतुल को विभिन्न धाराओं के तहत दोहरे आजीवन कारावास की सजा भी मिली है। दोषी की मां बसंती निहाले और बहन चंचल को साक्ष्य छिपाने के आरोप में दो-दो साल कैद की सजा सुनाई गई थी। क्या है मामला
मृतक बच्ची 24 सितंबर 2024 को अपने चाचा के फ्लैट से खेलते समय लापता हो गई थी। दो दिन बाद उसका शव आरोपी के घर पानी की टंकी में मिला था। भोपाल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने इस जघन्य अपराध को “विरलतम से विरलतम” (rarest of rare) श्रेणी का मामला बताया था। कहा था कि अगर मृत्युदंड से भी बड़ी कोई सजा होती, तो वह आरोपी को दी जानी चाहिए थी।


