हाईकोर्ट ने कहा- कोर्ट को पोस्ट ऑफिस समझ रखा है:भरतपुर कलेक्टर-एसपी को फटकार लगाई, कहा- पैरोल के मामलों में दिमाग क्यों नहीं लगाते

राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर कलेक्टर और एसपी को फटकार लगाते हुए कहा- आप लोगों ने कोर्ट को पोस्ट ऑफिस समझ रखा है। कोर्ट ने कहा- आप लोगों के रवैये के कारण अदालतों में पैरोल के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके कारण हम जरूरी मामलों की सुनवाई नहीं कर पाते हैं। बिना किसी ठोस कारण के सजायाफ्ता कैदी की पैरोल खारिज करने को लेकर शुक्रवार को जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की बेंच ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- इस तरह के मामलों में आप अपना माइंड अप्लाई (दिमाग लगाना) क्यों नहीं करते हैं। दरअसल भरतपुर सेंट्रल जेल में बंद कैदी अनिल कपूर उर्फ अलियास रिंकू की याचिका पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर भरतपुर कलेक्टर, एसपी, डीजीपी और एसीएस होम को तलब किया था। इस पर भरतपुर कलेक्टर और एसपी कोर्ट में पेश हुए। कलेक्टर ने कोर्ट को बताया कि कैदी की 20 दिन की पैरोल मंजूर कर ली गई है। वहीं एसीएस होम और डीजीपी ने विधानसभा सत्र में व्यस्त होने के कारण उपस्थिति से छूट चाही। इसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए 16 मार्च को अगली सुनवाई तय की है। हेड कॉन्स्टेबल की रिपोर्ट पर विश्वास किया, अपना माइंड इस्तेमाल नहीं किया
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए भरतपुर कलेक्टर और एसपी को कहा- मामले में याचिकाकर्ता कैदी 12 साल की सजा काट चुका है। वह पिछले 4 साल से ओपन जेल में है। एक हेड कॉन्स्टेबल स्तर के पुलिसकर्मी की रिपोर्ट पर आपने विश्वास कर लिया कि वह फरार हो सकता है। आपने अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं किया। कैदी का आचरण संतोषजनक
एडवोकेट गोविंद प्रसाद रावत ने कोर्ट को बताया- याचिकाकर्ता का आचरण संतोषजनक है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग भरतपुर के संयुक्त निदेशक ने भी रिपोर्ट में पैरोल देने की सिफारिश की थी। वहीं भरतपुर एसपी की रिपोर्ट के आधार पर उसके पैरोल पार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस पर कोर्ट ने भरतपुर एसपी की रिपोर्ट में की गई टिप्पणी को अनुचित और अनावश्यक बताया। कोर्ट ने कहा- एसपी ने रिपोर्ट में टिप्पणी की है कि याचिकाकर्ता माता-पिता से मिलने के लिए पैरोल चाहता है, जबकि उसके पिता स्वस्थ हैं और याचिकाकर्ता के 3 भाई पिता की देखभाल करते हैं। अगर आप किसी चीज को लेकर आशंका व्यक्त कर रहे हैं तो उसके संबंध में ठोस तथ्य पेश करें। कई बार कहा- लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ
कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर कहा था- हमने कई बार एसीएस होम और डीजीपी से इस व्यवस्था में सुधारात्मक उपाय करने का अनुरोध किया है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में हम उन्हें निर्देश देते हैं कि वे अगली सुनवाई पर कोर्ट में उपस्थित होकर इस लापरवाहीपूर्ण रवैये पर अपना स्पष्टीकरण दें। वहीं भविष्य में इस तरह की लापरवाही से बचने के उपायों के बारे में भी बताएं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पैरोल प्रार्थना पत्र पर पुनर्विचार करके उचित आदेश पारित करने के भी निर्देश दिए थे।

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