हाईकोर्ट ने कहा-लिवर सिरोसिस को गंभीर बीमारी नहीं मानना गलत:दतिया के शिक्षक के तबादले पर रोक, कहा- 30 दिन में गंभीरता देख नया फैसला लें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी बीमारी को केवल इसलिए गंभीर नहीं माना जा सकता क्योंकि उसका नाम स्थानांतरण नीति में सूचीबद्ध नहीं है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकल पीठ ने शिक्षक जैन सिंह लोधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता जैन सिंह लोधी दतिया जिले के पपरौन डेरा नायकखेड़ा में पदस्थ थे। उन्हें 17 जून 2025 को डिरोलिपार स्थानांतरित कर दिया गया था। लोधी लिवर सिरोसिस से पीड़ित हैं और उन्होंने अपने स्थानांतरण के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, उनकी आपत्ति को 24 नवंबर 2025 को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि लिवर सिरोसिस स्थानांतरण नीति में गंभीर बीमारियों की सूची में शामिल नहीं है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि नीति की धारा 24 में कैंसर, किडनी फेल्योर और ओपन हार्ट सर्जरी का उल्लेख केवल उदाहरण के तौर पर है, न कि यह बीमारियों की एक संपूर्ण सूची है। न्यायालय ने कहा कि नीति का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारी की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना है। प्राधिकारी ने याचिकाकर्ता की बीमारी की गंभीरता का मूल्यांकन किए बिना यांत्रिक रूप से आदेश पारित किया, जो न्यायसंगत नहीं था। नतीजतन, आपत्ति खारिज करने वाला आदेश निरस्त कर दिया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 30 दिनों के भीतर बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मामले पर दोबारा विचार कर नया निर्णय लिया जाए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *