ग्वालियर में नाबालिग बालिका की अवैध हिरासत से संबंधित हैबियस कॉर्पस याचिका का मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने निराकरण कर दिया है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति अनिल वर्मा की खंडपीठ ने बालिका को उसके माता-पिता के साथ भेजने की अनुमति दी। कोर्ट ने उसके संरक्षण और भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने बालिका की रुचि और भविष्य पर भी संवाद किया।
बालिका ने न्यायालय को बताया कि उसने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की है और वह आगे औपचारिक शिक्षा जारी नहीं रखना चाहती। हालांकि, उसे सिलाई, कढ़ाई और बुनाई जैसे रचनात्मक कार्यों में रुचि है। इस पर कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए कि बालिका की रुचि को ध्यान में रखते हुए उसे सिलाई-कढ़ाई और संबंधित कौशल प्रशिक्षण के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। संबंधित शासकीय विभागों और एजेंसियों को इसमें सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले, न्यायालय ने बालिका की देखरेख और काउंसलिंग के लिए महिला उप निरीक्षक क्षमा राजौरिया को ‘शौर्य दीदी’ नियुक्त किया था।
एक अन्य मामले में, हाईकोर्ट ने तीन साल के बच्चे की तलाश से संबंधित हैबियस कॉर्पस याचिका का भी निराकरण कर दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि 1 नवंबर को बच्चे के लापता होने की सूचना मिलते ही उसकी मां सपना पाल ने मुरार थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर तलाश अभियान चलाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि एसएसपी और आईजी स्तर के अधिकारियों की निगरानी में शहर के आसपास के इलाकों और जंगल क्षेत्रों तक में बच्चे की तलाश की गई है, और जांच अभी भी जारी है।


