भास्कर न्यूज | जालंधर हाईवे एक्ट के तहत दर्ज केस को लेकर वकील समुदाय खुलकर सामने आ गया है। एडवोकेट बलविंदर कुमार समेत 42 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को झूठा बताते हुए शहर के वरिष्ठ वकीलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। वकीलों ने कहा कि मामला राजनीतिक द्वेष के चलते दर्ज किया गया और निर्दोष लोगों को फंसाया गया। प्रेस वार्ता में एडवोकेट प्रीतपाल, हरप्रीत सिंह, मधु रचना, राजकुमार, हरभजन सांपला, पवन बैंस, राजिंदर कुमार और दीपक सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे। वकीलों के अनुसार 23 जुलाई 2023 को मकसूदां थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि गांव नूरपुर के अड्डे पर ड्रग्स के खिलाफ किए गए प्रदर्शन को आधार बनाकर केस बनाया गया, जबकि प्रदर्शन के दौरान हाईवे जाम नहीं किया गया था। उनका दावा है कि वीडियो साक्ष्यों में पुलिस अधिकारियों द्वारा स्वयं जाम लगाए जाने की बात सामने आती है। प्रतिनिधिमंडल ने गौरव यादव से मुलाकात की थी। एसएसपी होशियारपुर की जांच में आरोपियों को बेगुनाह पाया गया, बावजूद इसके सितंबर 2025 में जालंधर रूरल पुलिस ने चालान पेश कर दिया। वकीलों ने इसे शक्ति का दुरुपयोग बताते हुए कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।


