हाईवे से नहीं हटेंगी 1102 शराब की दुकानें:सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई अंतरिम रोक

प्रदेश में नगर निकाय की सीमा से गुजरने वाले हाइवे पर स्थापित करीब 1102 शराब की दुकानें बंद नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज हाईकोर्ट के इन दुकानों को हटाने अथवा ट्रांसफर करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह अंतरिम रोक राज्य सरकार और अन्य लाइसेंस धारकों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए लगाई। सरकार की ओर से पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट अपने अलग-अलग आदेशों से नगर निकाय सीमा में 500 मीटर की बाध्यता से शिथलन दे चुका हैं। ऐसे हाईकोर्ट अपने आदेशों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित विधि को नजरअंदाज और निरस्त नहीं कर सकता हैं। 500 मीटर की परिधि में स्थित दुकानों को हटाने के निर्देश
हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर ने 24 नवंबर 2025 को आदेश देते हुए राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि वह राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से 500 मीटर की परिधि में स्थित सभी शराब दुकानों की पहचान कर उन्हें हटाए एवं स्थानांतरित करे, भले ही वे नगर निगम सीमा, स्थानीय स्वशासी निकायों या वैधानिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आती हों। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि नगर सीमाओं का विस्तार सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों को शिथिल करने का आधार नहीं बन सकता हैं। राज्य को हो रहा था 2100 करोड़ का नुकसान
इन दुकानों के बंद होने से राज्य सरकार को करीब 2100 करोड़ के राजस्व के नुकसान होने का अनुमान था। लेकिन हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दुर्घटना संबंधी आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सार्वजनिक सुरक्षा, लगभग 2100 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान जैसी वित्तीय चिंताओं पर वरीयता रखती है। इसी आधार पर राज्य को निश्चित समय-सीमा में सभी ऐसी दुकानों को बंद अथवा स्थानांतरित करना होगा।

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