बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के आगामी चुनावों को लेकर प्रशासनिक और विधिक अधिकारों का टकराव बढ़ने लगा है। ‘हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी’ ने 24 फरवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चौथी बैठक की। इसमें लिए गए फैसलों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बार काउंसिल का पूरा नियंत्रण विशेष समिति के हाथों में होगा। कमेटी ने निवर्तमान चेयरमैन द्वारा जारी नोटिसों को अवैध घोषित करते हुए प्रशासनिक मशीनरी को सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत गठित कमेटी के कार्यों में हस्तक्षेप करने पर उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने की चेतावनी भी दी गई है। बैठक की अध्यक्षता और सुप्रीम कोर्ट का हवाला हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जे.आर. मिढ़ा ने बैठक में स्पष्ट किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 18 नवंबर 2025 के अपने आदेश में पूरी चुनाव प्रक्रिया को इस कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में रखने का निर्देश दिया है। कमेटी ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना उसकी वैधानिक जिम्मेदारी है। इसमें नामांकन से लेकर मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है। चेयरमैन के आदेशों को ठहराया अवैध बैठक के दौरान कमेटी ने पाया कि बार काउंसिल के चेयरमैन ने 23 फरवरी 2026 को कार्यवाहक सचिव विकास ढाका को एक मौखिक निर्देश और कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने भी एक नोटिस जारी किया था। कमेटी ने इन दोनों ही नोटिसों और पत्रों को पूरी तरह से ‘अमान्य’ और ‘अवैध’ करार दिया। कमेटी ने निर्देश दिया कि कार्यवाहक सचिव ढाका को इन नोटिसों का जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है। कमेटी का मानना है कि चूंकि वर्तमान अध्यक्ष और कई सदस्य खुद चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए उनका प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करना चुनाव की शुचिता को प्रभावित करता है। विशेष समिति का गठन और कार्यभार अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 8A के तहत, कमेटी ने एक ‘विशेष समिति’ को औपचारिक रूप से मंजूरी दी है। यह समिति तब तक कार्य करेगी जब तक नई निर्वाचित बॉडी कार्यभार नहीं संभाल लेती। समिति के सदस्य: राजेंद्र प्रसाद (महाधिवक्ता, राजस्थान): अध्यक्ष जगमाल सिंह चौधरी (वरिष्ठ अधिवक्ता): सदस्य अशोक मेहता (वरिष्ठ अधिवक्ता): सदस्य विशेष समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने 25 फरवरी को जोधपुर स्थित कार्यालय पहुंचकर अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को चेतावनी सूत्रों के अनुसार, कमेटी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई भी सदस्य या पदाधिकारी कमेटी के निर्देशों या मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करता है, तो उसे चुनाव से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। यह चेतावनी उन लोगों पर भी लागू होगी, जो किसी प्रत्याशी के प्रस्तावक या समर्थक बनते हैं। कमेटी ने स्पष्ट किया कि 19 फरवरी 2026 से प्रभावी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्टाफ के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ कमेटी ने बार काउंसिल के सभी कर्मचारियों को लिखित निर्देश दिए हैं कि वे अब केवल नई गठित विशेष समिति के आदेशों का ही पालन करेंगे। यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य बाहरी निर्देश का पालन करता है, तो उसे गंभीर ‘दुराचार’ माना जाएगा और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक लेन-देन के लिए स्पष्ट किया गया कि सभी चेक विशेष समिति की पूर्व स्वीकृति के बाद ही तैयार किए जाएंगे। विवाद का मुख्य कारण: अधिकारों की व्याख्या इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अधिकारों की जंग मुख्य वजह है। एक ओर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया का दावा है कि विशेष समिति गठित करने का अधिकार उसके पास है, वहीं हाई-पावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और अधिवक्ता अधिनियम की धाराओं का हवाला देते हुए अपने फैसले को विधिक रूप से सही ठहराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानूनी रस्साकशी आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है, क्योंकि वर्तमान परिषद के अधिकारों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है। फिलहाल, बार काउंसिल के गलियारों में सन्नाटा है और सभी की नजरें अब महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद की अगुवाई वाली विशेष समिति के अगले कदमों पर टिकी हैं।


