हाउसिंग बोर्ड-आरडीए की 11 कॉलोनियां निगम को, बदहाल हालत में ही हैंडओवर

राजधानी में वर्षों पहले विकसित हाउसिंग बोर्ड और आरडीए की 11 आवासीय कॉलोनियों को सरकार निगम को सौंपने जा रही है। हाल ही में हुए कैबिनेट के फैसले के बाद हाउसिंग बोर्ड, आरडीए और निगम तीनों संस्थाओं ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि जिन कॉलोनियों को निगम को हैंडओवर किया जाना है, वहां नालियां जाम हैं, उद्यान उजाड़ पड़े हैं और सड़कें जर्जर हैं। ऐसे में हैंडओवर के बाद बिजली, पानी, सड़क, स्ट्रीट लाइट और सफाई की जिम्मेदारी निगम पर होगी। इसके चलते निगम को अतिरिक्त अमले और बजट की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि कालोनियों के छोड़ शहर के 70 वार्डों में भी बिजली, पानी और सफाई व्यवस्था बाधित रहती है। गर्मी में शहर के कई वार्डों में पेयजल की समस्या विकराल हो जाती है और इन वार्डों में टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई करनी पड़ती है। डूंडा, देवपुरी जैसे वार्डों में तो अभी तक स्ट्रीट लाइट और सड़कें नहीं हैं। ऐसे में निगम को इन कालोनियों में भी बजट खर्च करना पड़ेगा। जानिए… शहर की इन कॉलोनियों का हाल- हाउसिंग बोर्ड की जिन कॉलोनियों को निगम को सौंपा जाएगा, उनमें कचना फेस-2, भावना नगर फेस-2, स्टूडियो अपार्टमेंट शंकर नगर, हिमालयन हाइट्स डूमरतराई फेस-1 व 2, शामिल है। इसी तरह कमल विहार और आरडीए की कॉलोनी इंद्रप्रस्थ, बोरियाखुर्द, सरोना, रायपुरा और हीरापुर शामिल हैं। दैनिक भास्कर ने इनमें से कुछ कॉलोनियों की ग्राउंड रिपोर्ट की तो पाया कि यहां की स्थिति काफी खराब है। इन कॉलोनियों में भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कचना फेस-2: गार्डन उजाड़, झूले टूटे
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कचना फेस-2 का हाल भी बुरा है। यहां सड़कें ठीक हैं, लेकिन नालियां बजबजा रही हैं। दोनों उद्यान उजाड़ पड़े हैं। न घास बची है, न बच्चों के झूले। सीवेज सुधार के लिए पाइपलाइन डाली गई है। गेट पर एक गार्ड तैनात है, लेकिन कॉलोनी प्रबंधन समिति का गठन नहीं हुआ। जगह-जगह कचरे का ढेर है। कमल विहार: पानी का संकट, सड़कें भी टूटी
आरडीए की कमल विहार में स्वतंत्र मकानों के साथ कई अपार्टमेंट, स्कूल और अस्पताल हैं। पर्याप्त मेंटेनेंस नहीं होने से अंदरूनी सड़कें जर्जर हो गई हैं। पेयजल संकट है और स्ट्रीट लाइट खराब है। महाकौशल अपार्टमेंट के रहवासियों ने बताया कि कॉलोनी का बोर खराब होने के बाद भी मरम्मत नहीं हुई। आठ मंजिला इमारत में सफाई व्यवस्था बदहाल है। बोरियाखुर्द आरडीए कॉलोनी: 1374 मकान जर्जर, ना​लियां भी जाम
बोरियाखुर्द कॉलोनी के 1374 मकान खराब स्थिति में हैं। स्ट्रीट लाइट और सफाई की कमी साफ दिखती है। नालियां जाम हैं और सड़कों पर गंदा पानी बहता है। रहवासी योगिता, संगीता और लक्ष्मी बताती हैं कि मकानों में लीकेज, सड़कों में गड्ढे और नियमित सफाई का अभाव बड़ी समस्या है। एक नजर में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सड्डू, जो 15 साल पहले निगम के हवाले
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का सेक्टर-8, यहां सफाई व्यवस्था तो बेहतर नजर आई। लेकिन सड़कें बदहाल हैं। गार्डन पूरी तरह से उजाड़ हो चुके हैं। खेल उपकरण भी पूरी तरह से टूट चुके हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार हैंडओवर के बाद लगा ​था कि कॉलोनी का विकास होगा, लेकिन आज तक कोई भी काम नहीं हो पाया। आमने-सामने: हाउसिंग बोर्ड – नगर निगम और विपक्ष जैसी है, उसी स्थिति में सौंपेंगे
हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को हैंडओवर किया जाना है। कॉलोनियों को हैंडओवर लेने के लिए निर्देश भी नगरीय प्रशासन विभाग जारी करेगा। कॉलोनियां जैसी स्थिति में है, उसी स्थिति में सौंपी जाएगी।
-अवनीश कुमार शरण, आयुक्त, हाउसिंग बोर्ड सर्वे कर डिमांड नोट भेजेंगे
शासन से जानकारी मिलने पर इन कॉलोनियों का सर्वे कराया जाएगा। डेवलपमेंट के जो भी काम होंगे, उसके लिए डिमांड नोट शासन को भेजा जाएगा। हमें उम्मीद है कि सरकार इन कॉलोनियों की व्यवस्था के लिए जरूर वित्तीय सहायता देगी। -मीनल चौबे, महापौर निगम की हालत पहले ही पतली
निगम की हालत पहले ही खराब है। ऐसे में बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के जिम्मेदारी लेना कठिन होगा। सरकार को चाहिए कि कॉलोनियों को हैंडओवर देने के साथ विकास के लिए राशि जारी करे। -आकाश तिवारी, नेता प्रतिपक्ष, निगम

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *