प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने वन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हाथियों के हमले में हुए नुकसान का मुआवजा 10 दिन के अंदर करें। सोमवार को पीसीसीएफ ने वन अधिकारियों के साथ बैठक की। कहा, हाथियों के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा की जिम्मेवारी भी वन विभाग की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है हाथी एवं जंगली जानवरों द्वारा हमले, दुर्घटना, मृत्यु की स्थिति में किसी भी हाल में 12 दिनों के अंदर मुआवजे का भुगतान किया जाए। पर, हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हम 10 दिन के अंदर ही मुआवजे का भुगतान कर दें। वन्य जीव हमले की रोकथाम में स्थानीय ग्रामीण की सहभागिता बढ़ाई जाए। इससे इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। ग्रामीणों को जागरूक करें। उन्हें उपाय बताएं। उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराएं। 30 मिनट के अंदर क्विक रिस्पांस टीम घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 680 के आसपास हाथी है। उनकी तथा मानव दोनों की सुरक्षा की जिम्मेवारी वन विभाग पर है। कॉरिडोर मैपिंग हो चुकी है। आधारभूत संरचना विकसित करें। उपकरणों की खरीद करें। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य प्राणी, रवि रंजन, मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी झारखंड एसआर नटेश, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रशासन बनकर अजिंक्य सहित सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी मौजूद थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने वन अधिकारियों के साथ की बैठक हाथी को शांत करने का प्रयास करें पीसीसीएफ (वन्य प्राणी) रवि रंजन ने कहा कि सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी आपस में समन्वय बना कर काम करें। केवल अपने वन प्रमंडल की रक्षा के लिए हाथी को न भगाएं। हाथी को शांत करने का प्रयास करें। त्वरित कार्यबल हाथी के साथ-साथ चले और यदि हाथी दूसरे वन प्रमंडल में प्रवेश करता है, तो दूसरे वन प्रमंडल की टीम साथ मिलकर कार्य करें। मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी एसआर नटेश ने कहा कि चेक डैम के निर्माण घास का मैदान पूरे राज्य में विकसित करने का प्रयास किया जाए।


