महंगाई बढ़ने के बीच पिछले 5 साल में राजस्थान में बैंकों का प्रति व्यक्ति कर्ज 66 फीसदी बढ़ा, जबकि जमा केवल 38.8 फीसदी बढ़ी। रिजर्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही तक प्रदेश में प्रति व्यक्ति कर्ज 78,023 रुपए और जमा 86,383 रुपए रही। इस तरह प्रति व्यक्ति जमा और ऋण के बीच 8,360 रुपए का अंतर है। पांच वर्षों में प्रदेश का ऋण-जमा अनुपात 75% से बढ़कर 90% हो गया। प्रति व्यक्ति कर्ज के मामले में राजस्थान देश के प्रमुख 17 राज्यों में नौवें, जमा में 13वें और ऋण-जमा अनुपात में 5वें स्थान पर है। देश में प्रति व्यक्ति जमा 1,65,933 रुपए, कर्ज 1,32,863 रुपए और ऋण-जमा अनुपात 80% है। हिंदी भाषी राज्यों में प्रति व्यक्ति कर्ज के मामले में राजस्थान सबसे आगे है। एसएलबीसी के अनुसार प्रदेश के 41 में से 20 जिलों में जमा से 100% से अधिक कर्ज लिया गया। बीकानेर 13वें, जयपुर 20वें स्थान पर है। जोधपुर 28वें, उदयपुर 31वें, कोटा 33वें और अजमेर 36वें स्थान पर हैं। बालोतरा 377% ऋण-जमा अनुपात के साथ पहले स्थान पर है। शीर्ष 5 में हनुमानगढ़, भीलवाड़ा, फलौदी और जैसलमेर हैं। डूंगरपुर 61.16% के साथ सबसे नीचे है। खुदरा लोन बढ़े, निवेश विकल्प से जमा घटी कर्ज बढ़ने का कारण व्यावसायिक उधारी, हाउसिंग तथा खुदरा लोन बढ़ना है। लोगों की बचत घटने के साथ निवेश विकल्प बढ़ने से लोग बैंकों के पास पैसा कम जमा करा रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार और बैंकों को बचत के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। अधिकतम प्रति व्यक्ति जमा वाले राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर ग्राम-बैंक, वित्तीय सहकारी संस्थाओं के गठन को प्रोत्साहित करना चाहिए। हालांकि 90.3% का ऋण-जमा अनुपात स्वस्थ माना जाता है, लेकिन 100% से ऊपर होना इस बात का संकेत है कि बैंकों के पास तरलता की कमी है या वे अत्यधिक जोखिम उठा रहे हैं। मसलन, तेलंगाना और तमिलनाडु का ऋण-जमा अनुपात 100% से अधिक है।
भास्कर एक्सपर्ट- कुलदीप गुप्ता व मुकेश जैन, आर्थिक विश्लेषक खुदरा लोन बढ़े, निवेश विकल्प से जमा घटी- कर्ज बढ़ने का कारण व्यावसायिक उधारी, हाउसिंग तथा खुदरा लोन बढ़ना है। लोगों की बचत घटने के साथ निवेश विकल्प बढ़ने से लोग बैंकों के पास पैसा कम जमा करा रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार और बैंकों को बचत के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। अधिकतम प्रति व्यक्ति जमा वाले राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर ग्राम-बैंक, वित्तीय सहकारी के गठन को प्रोत्साहित करना चाहिए। हालांकि, 90.3% का ऋण-जमा अनुपात स्वस्थ माना जाता है, लेकिन 100% से ऊपर होना इस बात का संकेत है कि बैंकों के पास तरलता की कमी है या वे अत्यधिक जोखिम उठा रहे हैं। मसलन, तेलंगाना और तमिलनाडु का ऋण-जमा अनुपात 100% से अधिक है।


