हिमाचल में ओल्ड पेंशन स्कीम पर संकट:कर्मचारियों में हलचल, RDG झटके के बाद UPS की सिफारिश, नई नौकरियां भी नहीं

हिमाचल प्रदेश की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने के बाद ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर संकट गहरा गया है। फाइनेंस डिपार्टमेंट सेक्रेटरी देवेश कुमार की सिफारिश ने कर्मचारियों को चिंता में डाला है। देवेश कुमार ने सालाना लगभग 10 हजार की RDG बंद होने के बाद OPS की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) देने की सरकार से सिफारिश की है, जबकि हिमाचल में कर्मचारियों ने OPS के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। OPS को कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही पहली कैबिनेट बैठक में मंजूरी देकर बहाल करने का निर्णय लिया था, अब उसी पर वित्त विभाग ने OPS देने पर असमर्थता जता दी है। वित्त विभाग ने UPS लागू करने की सिफारिश की है। इससे कर्मचारियों बीच असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है। कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि सीएम सुक्खू ने सभी कल्याणकारी योजनाएं जारी रखने का आश्वासन दिया है। ओपीएस: पहली गारंटी, अब वित्तीय बोझ? कांग्रेस ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान ओपीएस को अपनी पहली गारंटी बताया था। सरकार बनने के तुरंत बाद इसे बहाल भी कर दिया गया। फिलहाल राज्य पर ओपीएस का सालाना बोझ लगभग 1500 करोड़ रुपए से 2000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। मगर आने वाले वर्षों में यह खर्च बढ़कर 7 से 8 हजार करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच सकता है। ऐसे में अब RDG बंद होने के बाद इसे कंटीन्यू कर पाना चुनौतीपूर्ण होगा। यह संकेत फाइनेंस सेक्रेटरी ने दिए है। कर्मचारी नेता बोले- UPS की पैरवी करना गलत OPS बहाली की लड़ाई लड़ने वाले कर्मचारी नेता प्रदीप ठाकुर ने कहा कि जो अधिकारी आज UPS की सिफारिश कर रहे हैं, उन्होंने ही कुछ समय पहले OPS देने की बात कही थी। उन्होंने इसकी निंदा की। उन्होंने सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार के पास कर्मचारियों का लगभग 12 हजार करोड़ रुपए पेंडिंग है, उसे वापस लाया जाए। इससे सरकार कर्मचारियों की सभी देनदारिया चुकता कर सकती है। RDG बंद होना झटका हिमाचल की अर्थव्यवस्था पहले ही दबाव में है। ऐसे में अचानक RDG बंद होने से कर्मचारियों को एक के बाद एक कई झटके लगे है। फाइनेंस सेक्रेटरी ने स्पष्ट किया कि हम 8500 करोड़ रुपए का पुराने पे कमीशन का एरियर, डीए का 5000 करोड़ रुपए का एरियर नहीं दे पाएंगे। जनवरी 2026 से लागू होने वाला नया पे कमीशन भी हिमाचल नहीं दे पाएगा। इन फैसलों से कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ना तय माना जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि चुनावी वादों के आधार पर सरकार से उम्मीदें बंधी थीं, लेकिन अब वित्तीय संकट का हवाला देकर पीछे हटने के संकेत मिल रहे हैं। बेरोजगारों के लिए भी बुरी खबर वित्त सचिव ने दो साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने की सिफारिश की है। इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ेगा जो वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश में 10 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत बताए जाते हैं। यदि रिक्त पद खत्म किए जाते हैं, तो नई भर्तियों की संभावना और सीमित हो जाएगी। इससे युवाओं में निराशा बढ़ सकती है।

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