हिमाचल प्रदेश में करुणा मूलक आधार पर नौकरी का इंतजार कर रहे आश्रितों का इंतजार खत्म होने वाला है। प्रदेश सरकार ने इसको लेकर बड़ा फैसला किया है। मंगलवार को राज्य सचिवालय में सीएम सुक्खू ने करुणा मूलक रोजगार नीति को लेकर बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान करुणा मूलक आधार पर लंबित मामलों को एक साल में निपटाने के निर्देश दिए। वार्षिक आय सीमा बढ़ाने का फैसला
सरकार ने इन भर्तियों के लिए वार्षिक आय सीमा को 2.50 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने का फैसला किया है। फैसला हुआ है कि करुणा मूलक आधार पर लंबित मामलों को तीन चरणों में निपटाया जाएगा। पहले चरण में विधवाओं और 45 वर्ष से कम उम्र के अनाथों को आवेदन में प्राथमिकता दी जाएगी। शेष आवेदक तीसरे चरण में
प्रदेश में इस श्रेणी में 141 विधवाएं और 159 अनाथ बच्चे हैं। वहीं दूसरे चरण में कम वार्षिक आय वाले पात्र व्यक्तियों को रोजगार दिया जाएगा। शेष पात्र आवेदकों को तीसरे चरण में नौकरी मिलेगी। बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, आयुष मंत्री यादविंदर गोमा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। करुणा मूलक आश्रितों ने किया था आंदोलन
बता दें कि करुणा मूलक आश्रितों ने पूर्व भाजपा सरकार में नौकरी की मांग को लेकर प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया था। आश्रित शिमला में करीब एक साल से ज्यादा समय तक धरने पर बैठे थे। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए करुणा मूलक आश्रितों को उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था।


