हिमाचल प्रदेश में दिल्ली पुलिस द्वारा तीन युवा कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार करने को लेकर बहस छिड़ गई है। इस घटना को लेकर कानून के जानकारों की राय भी बंटी हुई है। कुछ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को गलत बता रहे हैं तो कई हिमाचल पुलिस के बर्ताव पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इससे अब कानूनी प्रावधानों, प्रक्रियाओं और पुलिस अधिकार क्षेत्र को लेकर नई बहस छिड़ गई है। शिमला के एडवोकेट पवन शर्मा का कहना है कि जब दूसरे राज्य की पुलिस किसी प्रदेश में इस तरह की कार्रवाई करती है तो लोकल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होता है। उन्होंने बताया कि अगर रोहड़ू में गिरफ्तारी के दौरान दिल्ली पुलिस पर हमला हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी भी राज्य की होती। इसलिए, सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी सूचना होना जरूरी है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर दर्ज FIR को वैध बताया। पूर्व DIG ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल हिमाचल के पूर्व DIG विनोद धवन ने दिल्ली पुलिस पर दर्ज FIR को गलत बताया और कहा कि जब हम ड्यूटी कर रहे पुलिस जवानों के साथ ऐसा करेंगे तो बाहरी राज्यों में हिमाचल पुलिस के साथ भी ऐसा ही होगा। उन्होंने बताया कि कई बार लोकल पुलिस ही आरोपियों को भगा देती है, इसलिए सूचना जरूरी नहीं है। उन्होंने हिमाचल पुलिस की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि जब गिरफ्तार किए लड़के हिमाचल के नहीं थे तो यह सब ड्रामा क्यों किया गया? दिल्ली पुलिस पर FIR गलत: नीरज गुप्ता हिमाचल हाईकोर्ट के एडवोकेट नीरज गुप्ता ने भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को बिल्कुल सही बताया। उन्होंने बताया कि लोकल पुलिस को इंटीमेशन देना जरूरी नहीं और दिल्ली पुलिस पर FIR नहीं बनती, क्योंकि दिल्ली पुलिस अपना काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल पुलिस की FIR नहीं टिक पाएगी। पुलिस को सूचना जरूरी: ठाकुर वहीं हिमाचल हाईकोर्ट के एडवोकेट नरेश ठाकुर ने कहा कि लोकल पुलिस थाना में रोजनामचे में रपट दर्ज कराना और लोकल पुलिस की मदद से गिरफ्तारी करना सामान्य प्रक्रिया है। दूसरे राज्य की पुलिस को किसी अपराधी की गिरफ्तारी से पहले लोकल पुलिस को इंटीमेशन देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस जवानों का वर्दी पहनना जरूरी नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सूचना देकर गिरफ्तारी को सुरक्षित बताया कानून के जानकारों के मुताबिक- दूसरे राज्यों में गिरफ्तारी से पहले परमिशन लेने को लेकर कानून में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। मगर संदीप कुमार बनाम स्टेट (एनसीटी ऑफ दिल्ली) मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकल पुलिस को सूचना देकर गिरफ्तारी को सुरक्षित बताया है। इस केस में कोर्ट ने यूपी पुलिस द्वारा संदीप की दिल्ली से गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे, क्योंकि यूपी पुलिस ने भी लोकल पुलिस को न सूचना दी और न सहयोग लिया था।


