हिमाचल में बिजली दरें पंजाब से 50 पैसे ज्यादा:उद्योगों को राहत की जगह मिला दोहरा झटका, रात्री रियायत भी खत्म

हिमाचल प्रदेश में बिजली की बढ़ती दरों से उद्योग जगत परेशान है। राज्य में बिजली की दरें पंजाब से 50 पैसे प्रति यूनिट अधिक हो गई हैं। सरकार ने जहां एक तरफ उद्योगों को 20 पैसे प्रति यूनिट की मामूली राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ रात्री रियायत वापस लेकर 35 पैसे का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। बिजली दरों में लगातार वृद्धि हुई पंजाब में उद्योगों को अभी भी 1.20 रुपए प्रति यूनिट की रात्री रियायत मिल रही है। पिछले तीन वर्षों में हिमाचल में बिजली दरों में लगातार वृद्धि हुई है। यह वृद्धि 50 फीसदी से अधिक हो चुकी है। इससे कई उद्योगों का परिचालन अस्थिर हो गया है। सरकार के फैसले पर नाराजगी बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ इंडस्ट्री एसोसिएशन और स्टील इंडस्ट्री एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। उद्योग संघ की पावर कमेटी के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि पिछले दो वर्षों में हुई 50 फीसदी की वृद्धि बोर्ड के इतिहास में सबसे अधिक है। इससे राज्य में नए निवेश की संभावनाएं कम हो गई हैं। 20 पैसे प्रति यूनिट की कमी की घोषणा हिमाचल प्रदेश विद्युत विनियमन आयोग (एचपी ईआरसी) ने वर्ष 2025-26 के लिए बिजली शुल्क में 20 पैसे प्रति यूनिट की कमी की घोषणा की है। उद्योगपतियों का कहना है कि यह राहत भ्रामक है। कुछ उद्योगपतियों ने गुमनाम रहते हुए एचपीईआरसी के चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चेयरमैन के गलत फैसलों से उद्योगों को नुकसान हो रहा है और सरकार की छवि भी खराब हो रही है। उद्योगपतियों ने चेयरमैन को हटाने की मांग की है, अन्यथा उद्योगों के पलायन की चेतावनी दी है। उद्योगों को पलायन करने पर न करें मजबूर हिमाचल स्टील इंडस्ट्री अध्यक्ष मेघराज गर्ग व महासचिव राजीव सिंगला का कहना है कि एक तरफ सरकार ने 20 पैसे प्रति यूनिट कम किया है और दूसरे तरफ सरकार में रात्री रियायत दोस्ती एक रुपए प्रति यूनिट थी, उसे वापस ले लिया है। जिससे 50 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इस तरह से फैसले उद्योगों को पलायन करने पर मजबूर कर सकते है। उन्होंने कहा कि पहले से स्टील इंडस्ट्री पर एजीएसटी व भारी ट्रांसपोर्टेशन का बोझ पड़ा है। बढ़ाया टैरिफ उद्योग जगत के खिलाफ उद्योग संघ अध्यक्ष राजीव अग्रवाल व महासचिव वाईएस गुलेरिया ने कहा कि आयोग का टैरिफ आदेश उद्योग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो उद्योग पलायन होने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि आयोग के अधिकारी उद्योग जगत के हित में न सोचकर गलत फैसले ले रहे है।

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