हिमाचल में APMC चेयरमैन की ‘ठाठ’:आर्थिक संकट के बीच 9 लग्जरी गाड़ियां खरीदीं, किसानों के पैसे से मौज, कृषि मंत्री को नहीं जानकारी

हिमाचल प्रदेश में फाइनेंशियल इमरजेंसी जैसे हालात के बीच मार्केटिंग बोर्ड ने 9 लग्जरी गाड़ियां ऑर्डर की हैं। ये गाड़ियां प्रदेश के अलग-अलग जिलों की कृषि उपज विपणन समिति (APMC) चेयरमैन के लिए खरीदी गई हैं। इनकी ऑन रोड कीमत 16 से 24 लाख रुपए के बीच बताई जा रही है। सूचना के अनुसार- टॉप मॉडल स्कॉर्पियो-N 4×4 तीन जिलों के APMC चेयरमैन के हवाले कर दी गई हैं, जबकि छह गाड़ियां जल्द APMC चेयरमैन को हैंडओवर की जाएंगी। टॉप मॉडल स्कॉर्पियो-N की ऑन रोड कीमत लगभग 22 से 24 लाख के बीच बताई जा रही है। इनकी खरीद के लिए आधा बजट राज्य सरकार ने दिया है, जबकि शेष बजट मार्केटिंग बोर्ड और APMC ने दिया है। किसानों का पैसा चेयरमैन की गाड़ियों पर खर्च स्टेट के मार्केटिंग बोर्ड और APMC के पास बजट किसानों-बागवानों का पैसा होता है, क्योंकि APMC बागवानों से मार्केट फीस लेती है। नियमों के तहत इस बजट का इस्तेमाल नई मंडियों के निर्माण और फल व सब्जियां उगाने वाले क्षेत्रों में सड़कें बनाने पर होना चाहिए। गाड़ी के एनटाइटलमेंट नहीं रखते चेयरमैन हैरानी इस बात की है कि APMC चेयरमैन सरकारी गाड़ियों के लिए पात्रता (एनटाइटलमेंट) नहीं रखते। इन्हें केवल सरकारी मीटिंग और मंडियों की इंस्पेक्शन के लिए गाड़ी दी जा सकती है। इसके एवज में सरकार इन्हें यात्रा भत्ता देती है। मगर प्रदेश में कई चेयरमैन दिन-रात सरकारी गाड़ियों में घूम रहे हैं और घर से दफ्तर लाने व घर छोड़ने में गाड़ियों का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। टैक्सियों पर भी हजारों रुपए खर्च हो रहा सरकारी गाड़ी पर जब चेयरमैन कब्जा कर लेते हैं तो कई जिलों में APMC सेक्रेटरी टैक्सी हायर कर लेते हैं। इन टैक्सियों पर भी हर महीने हजारों रुपए फूंके जा रहे हैं। शिमला APMC में टैक्सी हायर करने की अनुमति केवल सेब सीजन के दौरान होती थी, मगर अब 12 महीने टैक्सी हायर करके हजारों रुपए फूंके जा रहे हैं। 10 में से 9 APMC में चेयरमैन प्रदेश में कुल 10 APMC हैं। इनमें से सुक्खू सरकार ने 9 APMC में चेयरमैन तैनात कर रखे हैं। सरकार ने सभी के लिए गाड़ियां खरीदने का निर्णय लिया है। जिन APMC का राजस्व कम है, उन्हें बेस मॉडल स्कॉर्पियो-N खरीदी गई है। सरकार ने दी गाड़ियां लेने की परमिशन: पालरासू राज्य के एग्रीकल्चर सेक्रेटरी सी. पालरासू ने बताया कि सरकार ने 9 गाड़ियां खरीदने की परमिशन दी है। इनका 50 फीसदी बजट सरकार और शेष बजट मार्केटिंग बोर्ड APMC ने दिया है। कृषि मंत्री बोले- मुझे जानकारी नहीं हैरानी इस बात की है कि कृषि मंत्री चंद्र कुमार को इसकी जानकारी तक नहीं है। उन्होंने बताया कि हो सकता है कि मार्केटिंग बोर्ड के निदेशक मंडल में यह फैसला हुआ हो। वहीं मार्केटिंग बोर्ड के नव-नियुक्त चेयरमैन कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि उनकी नियुक्ति से पहले ही गाड़ियां खरीदी जा चुकी थीं। वह सुनिश्चित बनाएंगे कि इन गाड़ियों का मिसयूज न हो। इस वजह से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल इस बीच बीते रविवार को राज्य के फाइनेंस सेक्रेटरी देवेश कुमार ने शिमला में एक प्रेजेंटेशन दी। इसमें उन्होंने सभी प्रकार की सब्सिडी खत्म करने, कई कल्याणकारी योजनाएं बंद करने, कर्मचारियों-पेंशनरों का एरियर व डीए रोकने, दो साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने, बिजली बोर्ड के प्राइवेटाइजेशन, ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह UPS लागू करने जैसे कई सुझाव सरकार को दिए। ऐसे में सरकार ने चेयरमैन के लिए लग्जरी गाड़ियां खरीदने का निर्णय लिया है।

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