हिमाचल CM सुक्खू की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात:बोले- RDG बंद करना गलत, पर्वतीय राज्यों की दूसरे स्टेट से तुलना ठीक नहीं

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। सीएम ने वित्त मंत्री को बताया कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की तुलना उन 16 राज्यों से नहीं की जा सकती, जिनकी RDG बंद की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल की RDG पर 12.7 फीसदी की निर्भरता है, जो कि नागालैंड के बाद दूसरी सर्वाधिक है। जिनकी RDG बंद की गई है, उनमें अधिकांश ऐसे राज्य हैं, जिनकी RDG पर 2 फीसदी से भी कम निर्भरता थी। ऐसे में हिमाचल की अर्थव्यवस्था RDG का झटका नहीं झेल पाएगी। CM ने यह भी कहा कि सभी राज्यों का मूल्यांकन एक ही पैमाने पर करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत ऐसे अनुदान दिए जाते हैं ताकि राज्य अपने राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को पूरा कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है, जब वित्त आयोग ने छोटे पर्वतीय राज्यों की विकास संबंधी जरूरतों की पूरी तरह अनदेखी की है। सीएम बोले- दो से तीन सालों में खर्चे कम किए गए मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को यह भी जानकारी दी कि पिछले 2-3 वर्षों में खर्च घटाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, कोई ऑफ-बजट उधारी नहीं ली गई। लगभग 600 करोड़ रुपए वार्षिक विभिन्न उपकरों के माध्यम से जुटाए गए। CM ने कहा कि GST के कारण राज्य को राजस्व हानि हुई है। इसके बावजूद जहां संभव था, कर दरें बढ़ाई गईं और सब्सिडी को व्यवस्थित किया गया, फिर भी राजस्व घाटे का अंतर पूरा नहीं किया जा सका। हिमाचल को वित्तीय पैकेज मिले सीएम सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि पर्वतीय राज्यों की अर्थव्यवस्था का सही मूल्यांकन करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित की जाए और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व घाटे को पूरा करने हेतु विशेष केंद्रीय सहायता के तहत एक वित्तीय पैकेज की मांग की। इस पर निर्मला सीतारमण ने राज्य की मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण विचार करने का आश्वासन दिया। वित्त आयोग ने RDG बंद करने की सिफारिश की बता दें कि 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल समेत 17 राज्यों की RDG बंद करने की केंद्र सरकार से सिफारिश कर दी है। इससे हिमाचल को अगले 5 सालों के दौरान 40 हजार करोड़ से 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा। राज्य की लोन लेने की सीमा पहले ही GDP की 5 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दी गई है और जून 2022 से GST कम्पेनसेशन भी बंद है। अब RDG के तौर पर राज्य को तीसरा बड़ा झटका लगा है।

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