हृदय का दीपक जलने पर अज्ञान व भटकाव का अंत होता है: महाराज

लाडोवाल-बाड़ेवाल डोगरा स्थित इक जोत सत्संग घर में रूहानी सत्संग प्रेम समाज द्वारा परम संत बीर महाराज के ज्योति-ज्योत दिवस के उपलक्ष्य में विशाल समागम आयोजित किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में पहुंचे। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराज कमलबीर ने जीवन दर्शन का सार साझा किया। महाराज ने कहा कि आज का मनुष्य मानसिक व्याधियों और चिंताओं से घिरा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिंता का एकमात्र समाधान चिंतन है। जब हम अंतर्मुखी होकर चिंतन करते हैं तो हमारी सुप्त आत्मिक शक्तियां जागृत होने लगती हैं। इस अवस्था में व्यक्ति को बाहरी सहारों की बैसाखी की जरूरत नहीं रहती, बल्कि वह स्वयं अपना सहारा बन जाता है। सत्संग के दौरान महाराज ने जोर दिया कि जैसे ही हृदय का दीपक जलता है तो सारा अज्ञान और भटकाव स्वतः समाप्त हो जाता है। सत्संग के समापन पर विश्व शांति और सर्वत्र सुख-समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।

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