केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी दो दिनी यात्रा पर गुरुवार को रांची पहुंचे। शाम को वे सीएम आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के आला अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने एकबार फिर कोयला मंत्री रेड्डी के सामने खनिज रॉयल्टी के 1.36 लाख करोड़ रुपए बकाया भुगतान की मांग रखी। रेड्डी ने इस मामले के समाधान की पहल का भरोसा दिया। पिछले माह लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री ने कोयला रॉयल्टी मद में झारखंड के बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपए की मांग और दावे को खारिज कर दिया था। सीएम ने कहा कि खनन, परिवहन, जमीन अधिग्रहण मुआवजा, विस्थापन के साथ डीएमएफटी फंड व सीएसआर को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए केंद्र-राज्य को मिलकर आगे बढ़ाने की जरूरत है। इससे कोल माइनिंग से संबंधित समस्याओं का समाधान निकलेगा। लोगों के बीच माइनिंग को लेकर जो नकारात्मक मानसिकता है, उसे बदला जा सकेगा। सरकार ने बैठक में खनिज रॉयल्टी को लेकर क्षेत्रवार बकाया राशि का ब्योरा केंद्रीय कोयला मंत्री के सामने रखा। -शेष पेज 13 पर बैठक में बोले मुख्यमंत्री… खनन से हो रहा पर्यावरण नुकसान कम करने की जरूरत मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिजों का जिस तरह से खनन हो रहा है। उससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। इस दिशा में गंभीरता से सोच कर कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झरिया में जमीन के नीचे वर्षों से आग लगी हुई है, लेकिन उस पर अभी तक नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। घाटशिला के जादूगोड़ा में यूरेनियम के खनन की वजह से लोगों के समक्ष स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं आ रही है। इसका निदान होना चाहिए। कोयला मंत्री ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि कोयला खदानों के नीचे लगी आग को बुझाने और खनन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मामले में केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। जहां माइनिंग खत्म हो चुकी है, वह जमीन राज्य को वापस करें: हेमंत सीएम ने कहा कि राज्य में ऐसी कई कोल परियोजनाएं हैं, जहां खनन पूरा हो चुका है। कोल कंपनियों ने जमीन को छोड़ दिया है। पर जमीन न तो राज्य सरकार को हस्तांतरित की जा रही है और न ही उसका उपयोग हो रहा है। बंद हो चुकी कोल परियोजनाओं में अवैध माइनिंग हो रही है। इनमें कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। ऐसे में बंद खदानों की जमीन राज्य सरकार को वापस कर दी जाए। विस्थापितों को खनन परियोजनाओं में स्टेक होल्डर बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत {जमीन से लोगों का भावनात्मक लगाव का ख्याल रखने की जरूरत, परियोजनाओं में उनकी भागादारी तय होनी चाहिए {खनन परियोजनाओं में छोटे कार्यों के टेंडर विस्थापितों और स्थानीय को मिले।


