हेल्पिंग हैंड संस्था:बस्ती के बच्चों को शिक्षा से जोड़ हुनर को निखार रही मां-बेटी की जोड़ी

शिक्षा हमें वह पंख देती है, जिससे कितनी भी ऊंची उड़ान भरी जा सकती है। उस पंख को दिलाने का काम कुम्हेर गेट निवासी हेल्पिंग हैंड की अध्यक्ष रुना गुलाटी व उनकी बेटी नंदिनी कर रही है। मां-बेटी की जोड़ी िमलकर बस्ती के बच्चों को शिक्षा से जोड़ कर उनके हुनर को निखारने का काम कर रही है। वर्तमान में 60 बच्चों को ट्यूशन पढ़ा उनकी प्रारंभिक शिक्षा को सुधारने का प्रयास कर रही हैं, जिससे वह आगे चलकर शिक्षा के दम पर अपना करियर बना सकें। संस्था अध्यक्ष रुना गुलाटी बताती हैं कि खुद की कम उम्र में शादी होने के कारण 12वीं के बाद पढ़ाई पूरी करने का सपना पूरा नहीं कर सकी। रुना का सपना थी कि भी पढ़ लिख कर कुछ करें। शादी हुई और परिवार की जिम्मेदारी बढ़ी। बेटा-बेटी के बढ़े होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी से भी फ्री हो गई,जिसके बाद बच्चों व पति ने समाज के लिए कुछ करने के लिए प्रेरणा दी। सबसे पहले अपनी कामवाली के बच्चों को निशुल्क ट्यूशन देना शुरू किया। फिर देखते-देखते बस्ती के और बच्चे पढ़ने के लिए आने लगे और धीरे-धीरे संख्या 100 तक पहुंच गई। बच्चे अधिक होने के कारण 2 टीचर और रखे क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि सरकारी स्कूल में छोटे बच्चों को सही से हिंदी पढ़ना तक नहीं आता है और उनके पास इतने पैसे नहीं होते है कि वह फीस देकर ट्यूशन की पढ़ाई कर सके। संस्था को 4 साल हो गया है। मैं और मेरी 2 टीचर हर दिन दोपहर 3 बजे से 6:30 बजे तक ट्यूशन पढ़ाते हैं। हम लोग कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं। बेटी और उसके दोस्तों ने दी मदद
संस्था में बच्चों की संख्या बढ़ी तो उनके बैग, कॉपी, किताब के लिए बेटी नंदिनी ने अपने दोस्तों को भी संस्था से जोड़ा। शुरुआत में बेटी के दोस्त अपनी पॉकेट से 100 रुपए महीने संस्था को देते थे, जिससे बच्चों की कॉपी-किताब, स्वेटर खरीद कर दे सकें। संस्था में 25-20 लोग जुड़ कर सहायता कर रहे हैं। समरकैंप का आयोजन…
बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टियों में समरकैंप का आयोजन करते हैं। इसके अलावा बस्ती के लड़कियों को सिलाई, मैकअप, पेंटिग सिखाते हैं। इससे वह अपने हुनर को समझ पाती हैं।

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