होलाष्टक प्रारंभ: ग्रहों की उग्रता के साये में मनेगी होली, 3 मार्च तक मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक

भास्कर न्यूज | अमृतसर हिंदू धर्म में होली से आठ दिन पूर्व लगने वाले होलाष्टक की शुरुआत हो गई है। इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन आठ दिनों की अवधि में सौरमंडल के आठ प्रमुख ग्रह अत्यंत उग्र अवस्था में रहते हैं। अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु की उग्रता के कारण सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस वर्ष होलाष्टक, होलिका दहन और धुलंडी की तिथियों में परिवर्तन के साथ चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी रहेगा। इससे श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतनी होगी। इस वर्ष होलिका दहन के दूसरे दिन धुलंडी पर 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण के कारण इस बार होली जलाने और रंग खेलने की तिथियों में बदलाव किया गया है। पंडित ओम प्रकाश के अनुसार इस फाल्गुन पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण होने के कारण 1 मार्च को होलिका दहन शाम 6:34 से रात 9:03 बजे तक किया जाएगा। वहीं दो मार्च को रंगों का त्योहार होली खेली जाएगी। होलिका दहन से आठ दिन पहले लगने वाले होलाष्टक शुरू हो गया है। वहीं ग्रहण के सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य समेत रंगों से होली खेलना वर्जित माना जाता है। होलाष्टक में सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं, इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी कारण शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल के दौरान घर से बाहर न निकलें और नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करना शुभ फलदायी होता है। ग्रहण के बाद पूरे घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। होलाष्टक का महत्व : धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दौरान भगवान हनुमान, भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि पूजा करने से सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। होलाष्टक के आठ दिनों में व्यक्ति को निरंतर महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *