रंगों की होली जहां देशभर में धूमधाम से मनाई जा गई, वहीं सिख परंपरा में होला मोहल्ला आस्था, शौर्य और सेवा का प्रतीक बनकर सामने आया। पावन धाम गोल्डन टेंपल में इस अवसर पर अलौकिक दृश्य देखने को मिला। गुलाब के फूलों की वर्षा और इत्र की खुशबू से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वर्ण मंदिर सुगंध की चादर में लिपट गया हो। विशेष सजाई गई पालकी साहिब में विराजमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सुख आसन के लिए श्री अकाल तख्त साहिब ले जाया गया। इस दौरान संगत ने फूलों की वर्षा कर श्रद्धा प्रकट की और इत्र छिड़ककर वातावरण को और भी सुगंधित बना दिया। हर उम्र के श्रद्धालुओं ने देखा दिव्य नजारा बच्चे, युवा और बुजुर्ग—हर आयु वर्ग के श्रद्धालु इस दिव्य पल के साक्षी बने। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया। वहीं श्री आनंदपुर साहिब में निहंग सिंहों ने पारंपरिक युद्धकला और गतका के हैरतअंगेज करतब दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। होला मोहल्ला केवल पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और वीरता का संगम है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसा अद्भुत और रूहानी नजारा दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता।


