होली के त्योहार को लेकर तैयारियों के साथ ही चंग की थाप पर होली गीत सुनाई देने लगे हैं। बाजार में रंग-गुलाल की दुकानों पर रंग व पिचकारी सजने लगी। इस बीच होलिका दहन व धुलंडी पर्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। ज्योतिषी पं. सतीराम गौड़ व सुनील जोशी ने बताया कि निर्णय सागर पंचांग के अनुसार 2 मार्च सायं 5.56 बजे पूर्णिमा शुरू होगी, जो अगले दिन 3 मार्च को सांय 5.08 बजे तक रहेगी। ऐसे में होलिका दहन भी 2 मार्च को प्रदोष काल में सांय 6.43 बजे से रात्रि 9.17 बजे तक श्रेष्ठ हैं। पं. गौड़ ने बताया कि भद्रा के सम्बन्ध में शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि भद्रा निशीथकाल (मध्य रात्रि) के बाद तक रहे, प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका का दहन किया जा सकता है। इस वर्ष प्रदोष में भद्रा का मुख नहीं होने से प्रदोष वेला में होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है। धुलंडी के दिन पड़ने वाला यह खग्रास-ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में ग्रस्तोदित रूप में दृश्य होगा। वहीं ये ग्रहण बाड़मेर-जैसलमेर सहित पश्चिमी गुजरात में मांद्य रूप में दृश्य होने से इन क्षेत्रों में सूतक नियम नहीं लगने से 3 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। बाड़मेर-जैसलमेर जिले में नहीं रहेगा असर ज्योतिषी पं. सतीराम गौड़ ने बताया कि ग्रहण का सूतक 3 मार्च प्रातः 6.20 से सायं 6.47 बजे तक रहेगा। चंद्रग्रहण का विरल छाया में प्रभाव दोपहर 2.14 बजे से शुरू होकर, ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3.20 बजे, मोक्ष सांय 6.47 बजे होगा। लेकिन यह ग्रहण बाड़मेर, जैसलमेर मध्य एवं पश्चिमी गुजरात में मांद्य रूप में दृश्य होगा, अतः इन क्षेत्रों में ग्रहण सम्बन्धित वेध, सूतक, स्नान, दान, पुण्य, कर्म, यम, नियम आदि लागू नहीं होंगे। इस बार खग्रास/ग्रस्तोदित रूप में चन्द्रग्रहण ग्रहण की खगोलीय स्थिति खण्डग्रास एवं खग्रास दो प्रकार से बनते हैं। जब पृथ्वी, सूर्य व चन्द्रमा के बीच में आ जाती हैं तथा पृथ्वी चन्द्रमा के किसी हिस्से को ढकती है तो खण्डग्रास चन्द्रग्रहण होता है। यदि पृथ्वी चन्द्रमा को पूरा ढक लेती है तो खग्रास चन्द्रग्रहण होता है, ऐसे में इस बार ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण हैं, इसमें चन्द्रमा पहले से ही पृथ्वी की छाया में होकर उदित होता है, जिससे वह क्षितिज पर उदय होते समय ही ग्रहणग्रस्त, मलिन या लाल दिखाई देता है।


