भास्कर न्यूज | अंबिकापुर होली पर तुलसी साहित्य समिति ने मालवीय भवन में सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व व्याख्याता सच्चिदानंद पाण्डेय रहे। वहीं वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल ने अध्यक्षता की। इस दौरान गीता मर्मज्ञ पं रामनारायण शर्मा, कवि चंद्रभूषण मिश्र व प्रताप पांडेय भी शामिल हुए। संचालन कवि अजय सागर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ गीतकार पूनम दुबे वीणा ने सरस्वती वंदना से की। पं रामनारायण शर्मा ने 15वीं शताब्दी के महान संत व श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त चैतन्य महाप्रभु की जयंती पर उनके प्रेरक जीवन और योगदानों को याद कर कहा कि उन्होंने देश में भक्ति आंदोलन को तीव्र गति प्रदान की, राजनीतिक अस्थिरता के दौर में हिन्दू-मुस्लिम एकता को स्थापित किया, हिन्दुओं में फैली जाति-पाति, अस्पृश्यता, रूढ़ियों और भेदभाव को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने वैष्णव गौड़ीय सम्प्रदाय की आधारशिला रखी, विलुप्त वृन्दावन को फिर से बसाया। तारक ब्रहम महामंत्र हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे, हरे राम, हरे राम, राम-राम हरे-हरे इन्हीं की देन है। इसमें 16-16 शब्द के 32 अक्षर हैं। कवयित्री अंजू पांडेय ने होली को हर धर्म के लोगों का त्योहार बताते हुए इसे प्रेम और भाईचारे के साथ मनाने की अपील की। संस्था के अध्यक्ष दोहाकार व शायर मुकुंदलाल साहू के रोमांचक दोहे से कार्यक्रम का समापन हुआ। धन्यवाद ज्ञापन संस्था की उपाध्यक्ष कवयित्री आशा पांडेय ने किया। कवि श्याम बिहारी पांडेय ने फागुन में शहीदों को भी नहीं भुलाने की बात अपनी कविता में कही। कवि राजेन्द्र राज ने अपने सरगुजिहा गीत से खूब गुदगुदाया। आगे कहा होली की चर्चा हो और रंगरसिया कृष्ण की चर्चा न हो तो रंगपर्व फीका-सा लगता है। पं सच्चिदानंद पाण्डेय ने होली पर्व की प्रासंगिकता पर कहा कि यह पर्व जीवन में नैराश्य को दूर कर प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। इससे हमारी संस्कृति और एकता बलवती होती है। पर्व के दौरान नशे का परित्याग जरूरी है, तभी होली की सार्थकता होगी। रंगों की रीत है होली, प्रेम का प्रतीक होली कवि रामलाल विश्वकर्मा ने होली को रंगों की रीत पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी कविता से सबका ध्यान खींचा और खूब तालियां बटोरी। युवा कवि अमित प्रेम के संदेशपरक गीत ने सबको भावविभोर कर दिया। गीतकार पूनम दुबे वीणा ने रंगोत्सव में शहरों के साथ गांवों के भी रंगों से सराबोर होने की बात कही। हम होली खेलने आईं नंदलाल कहां है भाई वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे ने नटखट नंदकिशोर की होली में छिपा-छिपी की मोहक लीला का जिक्र किया। इन कवियों के अलावा आनंद सिंह यादव ने अपनी कविता से सबका ध्यान खींचा। कवि अजय सागर ने अपनी कविता से सबका भरपूर मनोरंजन किया।


