िसटी रिपोर्टर |बोकारो अगले महीना 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली रहेगी। होली से आठ दिन पूर्व 24 फरवरी को होलाष्टक की शुरुआत होगी और 3 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन समाप्त होगी। होलाष्टक के दौरान मुंडन, नामकरण, उपनयन जैसे शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। पंडित डी के झा बताते हैं कि, होलाष्टक के समय ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा से पूर्व आठ दिनों तक नकारात्मक उर्जा सक्रिय रहती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद की कठिन परीक्षाओं और भगवान शिव द्वारा कामदेव के भस्म होने की कथा से जुड़ा है। भक्त प्रह्लाद काफी यातनाएं दी गई थी। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता। शुभ व मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। पंडितों के अनुसार होलाष्टक के आठ दिन शुभ कार्यों पर रोक रहती है, लेकिन यह समय भगवान की आराधना, भजन-कीर्तन, जप, तप और दान-पुण्य के लिए यह समय अत्यंत उत्तम भी माना गया है। होलाष्टक में पूजा और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान श्रद्धालु अधिक से अधिक समय ईश्वर स्मरण, सत्कर्म और सेवा में व्यतीत करते हैं। होलाष्टक की समाप्ति के बाद होली दहन के साथ पुनः मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। होलाष्टक में मुंडन, गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए पंडितों के अनुसार होलाष्टक में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, उपनयन जैसे 16 संस्कार नहीं करना चाहिए। नया घर, दुकान या वाहन खरीदना-बेचना नहीं चाहिए।


