बैतूल के जेएच कॉलेज में 1 करोड़ 62 लाख रुपए के छात्रवृत्ति घोटाले में पुलिस ने रविवार को कॉलेज के दो पूर्व प्राचार्यों को भी आरोपी बनाया है। दिलचस्प है कि इनमें से एक प्रिंसिपल इस मामले में फरियादी थी। गंज पुलिस के टीआई अरविंद कुमरे ने बताया कि पिछले 17 दिसंबर को कॉलेज की पूर्व प्राचार्य विजेता चौबे ने कॉलेज के ही तीन कर्मचारियों के खिलाफ छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल होने की एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस जांच और प्रशासनिक टीम की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद अब उसी एफआईआर की फरियादी विजेता चौबे और एक अन्य प्राचार्य राकेश कुमार तिवारी को भी इस प्रकरण में आरोपी बना दिया गया है। टीआई ने बताया कि अब विजेता चौबे इस मामले की फरियादी नहीं होंगी। बल्कि हर वह व्यक्ति इस प्रकरण का फरियादी होगा जो जांच दल में शामिल रहा है। विजेता चौबे 11 दिसंबर 2023 से 9 नवंबर 2024 तक कॉलेज की प्राचार्य रही थी। वहां, राकेश कुमार तिवारी 14 फरवरी 2022 से 10 दिसंबर 2023 तक कॉलेज के प्राचार्य रहे है। 17 दिसंबर को हुई थी एफआईआर इस मामले में 17 दिसंबर को जे एच कॉलेज की तत्कालीन प्राचार्य विजेता चौबे की शिकायत पर कंप्यूटर ऑपरेटर दीपेश डहरिया, लिपिक सहायक ग्रेड 2 प्रकाश बंजारे और रिंकु पाटिल के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 409, 471, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि ये लोग गांव की बेटी योजना में सरकार से मिलने वाली रकम दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते थे। जांच में ऐसे 95 खाते सामने आए है। यह है पूरा मामला एजी एमपी ग्वालियर की ओर से नर्मदापुरम संभागायुक्त, बैतूल कलेक्टर और प्राचार्य जयवंती हक्सर कॉलेज को लिखे पत्र के बाद शुक्रवार को कॉलेज प्रबंधन को इस पूरे फर्जीवाड़े का पता चला। तब प्रिंसिपल ने उन 2 कमरों को सील करवा दिया। जिसमें गांव के बेटी योजना संचालित होती है। इन कमरों में योजना से जुड़े दस्तावेज रखे हुए थे। इस मामले में दो जांच टीमों की पड़ताल के बाद यह घोटाला 1 करोड़ 62 लाख रुपए का निकला। जिसमें प्रतिभा किरण योजना के 17 लाख रुपए का हेरफेर भी शामिल है। यह है गांव की बेटी योजना सरकार की ओर से गांव की बेटी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को 12वीं कक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने पर प्रतिमाह 500 रुपए की आर्थिक सहायता छात्रवृत्ति के रूप में दी जाती है। एक छात्रा को दस माह तक लगभग 5 हजार की राशि दी जाती है। आरोप है कि इस राशि में पीएम श्री जेएच कॉलेज में हेरफेर किया गया है। कॉलेज में जुलाई 2019 से सितंबर 2024 तक आडिट किया गया था। इस आडिट के दौरान गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद आडिटर ने उच्च शिक्षा विभाग के कमिश्नर और महा लेखाकार को गड़बड़ी के संबंध में पत्र लिखा था। महालेखाकार ने कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को भी गड़बड़ी की जांच करने के लिए पत्र लिखा। जिस पर कलेक्टर ने ट्रैजरी अफसर अरुण वर्मा सहित पांच सदस्यीय टीम को जांच का जिम्मा सौंपा था।


