नक्सली संगठन के महासचिव और सबसे टॉप लीडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने 3 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। तेलंगाना DGP ने आज 24 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी है। देवजी के साथ CCM संग्राम, SCM दामोदर और SCM नरसिम्हा रेड्डी ने भी हथियार डाला है। तेलंगाना पुलिस की तरफ देवजी और संग्राम पर कुल 25-25 लाख रुपए का इनाम घोषित है। जबकि ये दोनों छत्तीसगढ़ में मोस्ट वांटेड हैं। देवजी पर डेढ़ करोड़ और संग्राम पर एक करोड़ का इनाम घोषित है। बसवा राजू के एनकाउंटर के बाद ही देवजी को नक्सल संगठन का महासचिव बनाया गया था। देवजी बस्तर के 131 से ज्यादा जवानों का हत्यारा है। ताड़मेटला-रानीबोदली अटैक का मास्टरमाइंड है। देवजी के बाद रमन्ना और बेसरा के सरेंडर या एनकाउंटर से छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। अब बस्तर में सिर्फ 200 नक्सली ही बचे हैं। बता दें कि देवजी (65) तेलंगाना के जगतियाल जिले का रहने वाला है और उसका आत्मसमर्पण संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वर्तमान में ये नक्सल संगठन का सबसे बड़ा लीडर था। कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में चल रहा अभियान गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया था कि, कर्रेगुट्टा में अभियान चल रहा है। अभी तक 89 आईईडी बरामद हो चुकी है। बताया जा रहा है इस अभियान के तहत बाकी बचे नक्सलियों को आखिरी मौका दिया गया है कि वे मुख्य धारा में वापस लौट आए। 17 फरवरी को CRPF के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा हिल्स पर KGH 2 लॉन्च किया है। इसके तहत पुलिस शेष बचे नक्सली लीडर मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और राजी रेड्डी समेत 300 नक्सलियों की तलाश कर रही है। बस्तर में करीब 200 नक्सली बचे नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है। अब उन 2 नक्सलियों के बारे में जानिए… जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए। गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है। 2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था। ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा। 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के मदनडीह गांव का रहने वाला है। वो पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का मेंबर है। इसके अलावा ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो मिलिट्री का इंचार्ज और प्रवक्ता है। मिशिर बेसरा ने कई बड़े हमलों के आइडिया से लेकर प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में मुख्य भूमिका निभाई। एंबुश लगाने में माहिर: पहले एंटी नक्सल टीम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने बताया, ‘बेसरा का सबसे बड़ा काम लेवी वसूलना है। इसके पकड़े गए साथियों ने बताया कि संगठन के लिए बेसरा सबसे ज्यादा पैसा इकट्ठा करता है। टीम को बढ़ाने के लिए वो अपने इलाके के सबसे अच्छे लड़ाकों को रिक्रूट करता है। एक लीडर की तरह हमले की रणनीति बनाता है और खुद भी लड़ता है। अधिकारी आगे बताते हैं, ‘वो लड़ाकों को ट्रेंड करने के लिए पूरे देश में जाता है। बेसरा के जैसा एंबुश संगठन में कुछ ही लोग लगा पाते हैं। यही वजह है कि उसे पकड़ने के लिए मेरे वक्त तक (2023 तक) करीब 8 टीमें तैनात की गई थीं। अब तो और भी टीमें बन गई हैं।’ ‘बेसरा लड़ाकों का घेरा बनाने, एंबुश लगाने और बंकर बनाने में माहिर है। उसका काम हमले की रणनीति बनाना और एग्जीक्यूट होने तक उसकी निगरानी करना है। वो अपने इलाके में नई भर्तियां भी करता है। 1990 से नक्सली गतिविधियों में एक्टिव है। उसे कोल्हान-सारंडा जंगलों में किए गए कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है।’ …………………… इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… शाह बोले-नक्सलियों से चर्चा नहीं, हथियार डालना ही ऑप्शन:जगदलपुर में कहा- 31 मार्च तक देश से मिटा देंगे नक्सलवाद, मुरिया दरबार की रस्म निभाई जगदलपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च से पहले बस्तर नक्सलमुक्त हो जाएगा। दिल्ली के लोगों ने भ्रम फैलाया, नक्सलवाद ने बस्तर को विकास से दूर किया, लेकिन अब भाजपा शासन में मुफ्त स्वास्थ्य बीमा, 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर धान खरीदी और एक माह में 500 से अधिक नक्सलियों का सरेंडर जैसे ठोस कदम उठाए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…


