दसवीं बोर्ड की परीक्षा दे रहे विद्यार्थी इन दिनों दोहरी चिंता से गुजर रहे हैं। एक ओर अच्छे अंक लाने का दबाव है, तो दूसरी ओर 11वीं-12वीं में सही स्ट्रीम चुनने की उलझन। मेडिकल, नॉन-मेडिकल, कॉमर्स या आर्ट्स- एक गलत फैसला पूरे करियर की दिशा बदल सकता है। शहर के स्कूलों में काउंसलर्स के पास सबसे बड़ा सवाल यही पहुंच रहा है “कौन-सी स्ट्रीम चुनें?” शिक्षकों के अनुसार, करीब 60-70% विद्यार्थी सही चुनाव को लेकर असमंजस में हैं। करियर के बढ़ते विकल्पों ने जहां मौके बढ़ाए हैं, वहीं कन्फ्यूजन भी बढ़ाया है। हर दूसरे छात्र पर पैरेंट्स का दबाव है, आंकड़े बताते हैं कि हर 10 में से 5 छात्र अपने माता-पिता की पसंद से अलग स्ट्रीम लेना चाहते हैं। कई अभिभावक रिश्तेदारों या पड़ोसियों के बच्चों का उदाहरण देकर दबाव बनाते हैं। वहीं, कुछ छात्र विदेश में सेटल दोस्तों या कजिन्स की लाइफस्टाइल देखकर प्रभावित हो जाते हैं, लेकिन उस फील्ड की चुनौतियों और अपनी क्षमता को नजरअंदाज कर देते हैं। रोहिनी रोहित, प्रिंसिपल अलका अरोड़ा, काउंसलर एडमिशन नजदीक आते ही ‘भेड़चाल’ विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर विद्यार्थी परीक्षा खत्म होने तक अपने भविष्य को लेकर गंभीर नहीं होते। एडमिशन का समय आते ही वे जल्दबाजी या दोस्तों की देखा-देखी स्ट्रीम चुन लेते हैं। यही फैसला आगे चलकर पछतावे का कारण बनता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रीम का चयन दबाव में नहीं, बल्कि रुचि और क्षमता के आधार पर होना चाहिए। करियर काउंसलिंग वर्कशॉप और साइकोमेट्रिक टेस्ट विद्यार्थियों को सही दिशा देने में मददगार साबित हो सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए सुझाव… विद्यार्थियों के लिए सबसे जरूरी है कि वे ‘भेड़चाल’ से बचें और दोस्तों की देखा-देखी कोई स्ट्रीम न चुनें। दोस्त कॉलेज तक साथ हो सकते हैं, लेकिन करियर का फैसला पूरी जिंदगी को प्रभावित करता है। सिर्फ सैलरी को आधार न बनाएं, बल्कि अपनी पर्सनैलिटी और पोटेंशियल को पहचानें। अपनी पसंद के करियर से जुड़ी छोटी-छोटी वर्कशॉप्स में हिस्सा लें, ताकि आपको यह समझ आ सके कि उस काम में सचमुच आपकी रुचि है या नहीं।


