10 गांवों के किसान परिवार सहित कलेक्ट्रेट पहुंचे, कहा- पंपों के काटे गए कनेक्शन जोड़ें

भास्कर न्यूज | बेमेतरा शिवनाथ नदी के किनारे स्थित लगभग 10 गांवों के किसान सोमवार को परिवार सहित कलेक्ट्रेट पहुंचे और सिंचाई पंपों के काटे गए बिजली कनेक्शन दोबारा जोड़ने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। किसानों का आरोप है कि ग्रीष्मकालीन धान फसल की सिंचाई के लिए उपयोग किए जा रहे मोटर पंपों के बिजली कनेक्शन अचानक काट दिए गए, जिससे फसल पर संकट खड़ा हो गया है। पिछले सप्ताह जिला प्रशासन ने गर्मी फसल के लिए बिना अनुमति शिवनाथ नदी से पानी लेकर सिंचाई कर रहे पंपों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बिजली कनेक्शन कटवाए थे। प्रशासन का कहना है कि जिले में पेयजल और निस्तारी संकट को देखते हुए नदी में उपलब्ध जल को संरक्षित रखना आवश्यक है। कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान ग्राम जेवरी, अमोरा, बीजाभाठ, अतरगढ़ही, बहीगा, मरका, फरी, बहेरघाट, बावनलाख, आंदू व बूढ़ाजोग सहित अन्य गांवों से आए थे। किसान देर शाम तक परिसर में बैठे रहे और शीघ्र समाधान की मांग करते रहे। 70 प्रतिशत लागत लगा चुके किसान किसानों का कहना है कि वे ग्रीष्मकालीन धान फसल के लिए लगभग 70 प्रतिशत लागत खर्च कर चुके हैं। यदि समय पर सिंचाई नहीं हुई तो पूरी फसल सूखने का खतरा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने बताया कि राज्य स्तर पर ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है, इसके बावजूद बिजली कनेक्शन काटे जाना अनुचित है। जिले में इस प्रकार के नियमों के कारण किसानों को हानि हो रही है। सरपंच संतोष खेमचंद साहू, गोपीचंद और ऋषि कुमार साहू ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कनेक्शन बहाल करने की मांग की है। कमेटी के निर्णय अनुसार होगी कार्रवाई: भटनागर बिजली कंपनी के कार्यपालन अभियंता जीएस भटनागर ने बताया कि बिना अनुमति के सिंचाई पावर पंप उपयोग करने के कारण जिला प्रशासन और समिति के निर्णय अनुसार बिजली कनेक्शन काटे गए हैं। कमेटी के निर्णय अनुसार जो भी आदेश, होगा बिजली कंपनी कार्रवाई करेगी। बारिश में बाढ़ से फसल को नुकसान शिवनाथ नदी के किनारे स्थित गांव की किसानों का कहना है कि वर्षा कल के दौरान नदी में बाढ़ आने पर किनारे स्थित खेत में पानी भर जाता है। इससे फसल प्रति वर्ष बर्बाद हो जाती है। इससे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। जिसके कारण ज्यादातर किसान गर्मी के दिनों में ही धान की ग्रीष्मकालीन खेती करते हैं, ताकि जीवन यापन चल सके। लेकिन पिछले 2 साल से वाटर लेवल डाउन होने के कारण जिले में गंभीर पेयजल और निस्तारी संकट उत्पन्न हो गया है

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