वार्ड 11 रामद्वारा से उदयरामसर रेलवे स्टेशन तक करीब 4 किलोमीटर लंबी सड़क बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। लगभग दस वर्ष पूर्व निर्मित यह सड़क अब पूरी तरह टूट चुकी है और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीणों और रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि रोजमर्रा का आवागमन बेहद कठिन हो गया है, लेकिन अब तक प्रशासन ने सुध नहीं ली। उदयरामसर रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ियों का ठहराव होने के कारण यात्रियों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। टैक्सी और निजी वाहन चालकों का कहना है कि टूटी सड़क के कारण वाहन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और कई बार बीच रास्ते में ही खराब हो जाते हैं। बारिश के बाद स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले हैं। सड़क की हालत ऐसी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। रात के समय अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है। रेलवे कर्मचारियों को ड्यूटी पर आने-जाने में रोज जोखिम उठाना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी महेन्द्र लेखाला ने बताया कि पूरे 4 किलोमीटर मार्ग का नए सिरे से डामरीकरण कराया जाए, ताकि आमजन और रेलवे कर्मचारियों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यह मार्ग केवल एक गांव की जरूरत नहीं, बल्कि रेलवे स्टेशन से जुड़ा मुख्य संपर्क मार्ग है। उपेक्षा की मार, विकास कार्यों की निगरानी पर सवाल सड़क निर्माण के केवल दस वर्ष बाद ही इस स्तर की दुर्दशा गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमित मरम्मत और समय पर पैचवर्क किया जाता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अब पूरी सड़क दोबारा बनाने की नौबत आ गई है, जिससे सरकारी खर्च भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण संपर्क मार्गों का समय-समय पर निरीक्षण और रखरखाव आवश्यक है। यदि जल्द ही डामरीकरण नहीं हुआ तो किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जनसमस्या पर कब ठोस कदम उठाता है।


