101 कन्याओं का सम्मान, नन्हीं परियों के बनाए आधार कार्ड, नाटक से गूंजा बेटी बचाओ का संदेश

भास्कर न्यूज | जालंधर लोहड़ी का त्योहार यानी नई फसल और नई खुशियों के आगमन का पर्व। पारंपरिक रूप से यह पर्व घर में पुत्र जन्म की खुशी में विशेष रूप से मनाया जाता था, लेकिन बदलते दौर में अब बेटियों के आगमन पर भी वही उत्साह दिखने लगा है। इसी सामाजिक बदलाव को मजबूती देने के लिए हमसफर यूथ क्लब ने इस वर्ष लोहड़ी के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें 101 नवजात बेटियों और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। क्लब के सदस्यों की ओर से दोआबा कॉलेज में 101 नवजन्मी बेटियों की लोहड़ी मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत प्रबंधकों ने ज्योति प्रज्जवलित कर की। क्लब के अध्यक्ष रोहित भाटिया ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि आज के समय में बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। ऐसे में उनकी पहली लोहड़ी को भी उसी धूमधाम से मनाया जाना चाहिए जैसे बेटों की मनाई जाती है। इस दौरान बच्चियों के परिजनों के चेहरे पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी। कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि ने क्लब के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा, “जब समाज बेटियों के जन्म पर खुशियां मनाना शुरू कर देगा, तभी सही अर्थों में महिला सशक्तिकरण संभव होगा। समारोह में बेटी बचाओं पर नुक्कड़ नाटक, सभ्याचारक कार्यक्रम और 101 से अधिक नवजन्मीं बेटियों का आधार कार्ड बनाया गया। लोहड़ी के इस जश्न में केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का रंग भी देखने को मिला। मंच पर बेटियों ने पारंपरिक गिद्दा और भांगड़ा पेश किया। ढोल की थाप पर बेटियों के परिवारों ने भी झूमकर अपनी खुशियों का इजहार किया। समारोह स्थल पर जब 101 माताएं अपनी नन्हीं परियों को गोद में लेकर पहुंचीं, तो पूरा वातावरण ममतामयी हो गया। उन नन्हीं हथेलियों और मासूम चेहरों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो साक्षात खुशियां धरती पर उतर आई हो। क्लब की ओर से इन बेटियों को विशेष उपहार, नए वस्त्र, शगुन और माता-पिता को सम्मान पत्र भेंट किए गए। एक नवजात बेटी की मां ममता ने कहा कि आज पहली बार महसूस हो रहा है कि मेरी बेटी का आना सिर्फ मेरे परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव की बात है। इस सम्मान ने समाज के तानों को एक सुखद संगीत में बदल दिया है।

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