108 सेवा… कॉल करने के 60 मिनट बाद भी नहीं आती एंबुलेंस, मरीज की हो रही मौत

इमरजेंसी में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए शुरू की गई सरकारी एंबुलेंस सेवा 108 नंबर की व्यवस्था बेहद लचर है। नियम है कि कॉल करने के बाद शहरी इलाके में अधिकतम 25 मिनट और ग्रामीण इलाके में अधिकतम 40 मिनट में लोकेशन पर एंबुलेंस पहुंच जाए। कुछ मामलों में तो एंबुलेंस समय पर मरीज के पास पहुंच रही है। लेकिन, ज्यादातर मामलों में निर्धारित रिस्पांस टाइम का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। कॉल करने के 60 मिनट बाद भी 108 एंबुलेंस लोकेशन पर नहीं पहुंच पा रही है। परिजनों के बार-बार कॉल करने और एंबुलेंस जल्दी भेजने का आग्रह करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। किसी की जान चली जा रही है तो किसी की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। लोगों ने यह भी बताया कि 108 कॉल सेंटर में कॉल करने के बाद लंबे समय पर होल्ड में रखा जाता है। इसके बाद जानकारी दी जाती है कि एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। 108 सेवा की बदहाली की एक वजह यह भी है कि करीब 77 गाड़ियां अंडर मेंटेनेंस हैं। इसे बनवाने के लिए संचालन कर रही एजेंसी के पास पैसे नहीं है। एजेंसी के अधिकारी ने कहा कि विभागीय स्तर से करीब 45 करोड़ बकाया है। इस वजह से खराब गाड़ियों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इनमें नई और पुरानी दोनों एंबुलेंस शामिल हैं। इधर, एक वजह यह भी है कि सरकार ने चुनाव आचार संहित लगने के एक दिन पूर्व आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया करते हुए नई एजेंसी का चयन कर लिया है। हालांकि, अभी उक्त एजेंसी को वर्क ऑर्डर विभाग के स्तर से नहीं जारी किया गया है। इधर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी 108 एंबुलेंस की टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद इसपर जांच करा रहे हैं। 3 केस से समझिए… एंबुलेंस नहीं​ मिलने से कैसे मरीजों की जान पर बन आई रातू के रहने वाले हरिशचंद्र महतो ठंड के कारण अचानक बेहोश हो गए। स्थानीय चिकित्सक ने देखने के बाद ब्रेन स्ट्रोक बताते हुए तत्काल रिम्स ले जाने की सलाह दी। 108 एंबुलेंस को फोन करने के बाद भी काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। फोन करने पर एंबुलेंस चालक हर बार 10 मिनट में ही पहुंचने की बात कहता रहा। 1 घंटा 5 मिनट के बाद एंबुलेंस पहुंची। देर होने के कारण रिम्स ले जाने के दौरान रास्ते में ही मरीज की मौत हो गई। क्या है नियम… देश भर में सरकारी व्यवस्था के तहत संचालित सभी एंबुलेंस में रिस्पॉन्स टाइम निर्धारित है। झारखंड में भी कॉल सेंटर पर फोन आने के बाद एंबुलेंस के लोकेशन में पहुंचने के लिए रिस्पॉन्स टाइम निर्धारित है। राज्य के शहरी क्षेत्र में रिस्पांस टाइम 25 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 40 मिनट है। हर हाल में एंबुलेंस को इस अवधि में लोकेशन पर पहुंचना है। रिस्पॉन्स टाइम मैनेज हो सके, इसलिए रिमोट लोकेशन के जरिए नजदीकी एंबुलेंस को ही भेजा जाता है। लेकिन दुर्भाग्य है कि झारखंड में 80% मामलों में रिस्पांस टाइम फेल साबित हो रहा है।77 एंबुलेंस के खराब होने के कारण थोड़ी परेशानी हो गई है 543 एंबुलेंस में 77 एंबुलेंस सिविल सर्जन के स्तर से रिपेयर एंड मेंटेनेंस में है। एंबुलेंस के खराब होने के कारण संख्या कम हो गई है, इसलिए थोड़ी परेशानी है। मरम्मत कराने में भी दिक्कत आ रही है, क्योंकि एनएचएम द्वारा करीब 45 करोड़ एजेंसी को बकाया है। भुगतान के लिए हमने कई बार एनएचएम को पत्राचार किया हैै। -बिक्रम चक्रवर्ती, स्टेड हेड, ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज कॉल सेंटर में फोन आने के बाद शहर में 25 मिनट व गांव में 40 मिनट है रिस्पांस टाइम झारखंड में 108 सेवा के तहत कुल 543 एंबुलेंस हैं। करीब 35% एंबुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस है, जबकि शेष बेसिक लाइफ सपोर्ट और नियोनेटल एंबुलेंस है। 543 में 37 गाड़ियां ऑफ रोड हैं, यानी चलने की स्थिति में नहीं है। जबकि करीब 40 एंबुलेंस मेंटेनेंस में है। खराब पड़ी कुल गाड़ियों की संख्या 77 है। प्रतिदिन कॉल सेंटर में एंबुलेंस के लिए रांची से 650 से 700 लोग कॉल करते हैं, इसमें 250 के करीब जेनुइन कॉल और शेष फॉलोअप कॉल होता है। 250 में प्रतिदिन केवल 70 से 80 मरीज को ही सरकारी एंबुलेंस की सुविधा मिल पाती है, बाकी को प्राइवेट एंबुलेंस या निजी गाड़ी का सहारा लेना पड़ता है। केस 1 टाटीसिलवे में 19 दिसंबर को सड़क दुर्घटना में एक बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। युवक के पैर की हड्डी टूट गई। मौके से ही भीड़ में मौजूद एक शख्स ने 108 नंबर पर फोन किया और एंबुलेंस भेजने को कहा। लेकिन, आधा घंटा इंतजार करने की बात कही गई। इधर, सड़क पर घायल दर्द से कराहता रहा। करीब 40 मिनट बीतने पर भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो स्थानीय लोगों ने एक निजी गाड़ी को रोककर उसे अस्पताल भिजवाया। केस 2 ओरमांझी प्रखंड के जिदू गांव निवासी सुरेश पासवान की मौत भी एंबुलेंस के इंतजार में घर पर ही हो गई। मरीज को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने 108 नंबर पर फोन​ किया। लेकिन, केस 3 कॉल सेंटर वाले ने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात कही। घर वालों ने करीब 4 घंटे तक फोन लगाया। इधर, एंबुलेंस के इंतजार में मरीज ने घर पर ही दम तोड़ दिया।

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