भास्कर न्यूज | अमृतसर केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा (रजि.) ने केंद्र सरकार की कथित जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को होने वाली एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का पुरजोर समर्थन किया है। सभा के पदाधिकारियों ने देश के समस्त लेखकों, विद्वानों और चिंतकों से अपील की है कि वे इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनकर लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की आवाज बुलंद करें। सभा के अध्यक्ष दर्शन बुट्टर, महासचिव सुशील दुसांझ और अन्य नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि यह हड़ताल निजीकरण की नीतियों, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 2025 जैसे फैसलों के खिलाफ है। उन्होंने मनरेगा में किए जा रहे बदलावों और चार लेबर कोड को रद्द कर मजदूर-हितैषी कानून बनाने की मांग की। लेखकों ने भारत और अमेरिका के बीच हो रहे असमान व्यापार समझौते पर भी गहरा रोष जताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता छोटे किसानों और लघु उत्पादकों को तबाही की ओर धकेलेगा, इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। पदाधिकारियों ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था, कृषि और मजदूर वर्ग को बचाने के लिए जन संगठनों, किसानों और कर्मचारियों के साथ लेखकों का खड़ा होना समय की मांग है। केंद्रीय सभा के पदाधिकारी सैलिंदरजीत सिंह राजन, सुरिंदरप्रीत घणिया, दलजीत सिंह साही, बलविंदर संधू, मनजीत इंदरा, भुपिंदरप्रीत, डॉ. शिंदरपाल, डॉ. करमजीत सिंह आदि ने लेखकों, विद्वानों और चिंतकों से ज़ोरदार अपील की कि वे इस हड़ताल में सक्रिय भागीदारी कर लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और जन-हितैषी नीतियों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करें।


