बंजर जमीन का उपयोग देखना हो तो कभी रांची के खलारी स्थित पिपरवार क्षेत्र में आइए। बंजर जमीन के उपयोग से आज पूरा पिपरवार क्षेत्र ग्रीन एनर्जी का उपयोग कर रहा है। दरअसल, पिपरवार के कारो गांव में सीसीएल ने 125 एकड़ बंजर भूमि पर 20 मेगावाट क्षमता का सोलर एनर्जी प्लांट लगाया है। इस प्लांट से हर माह करीब 32 लाख यूनिट बिजली पैदा हो रही है, जो कि पिपरवार क्षेत्र में बिजली की जरूरत का 70 प्रतिशत है। सीसीएल पिपरवार क्षेत्र के अभियंता यांत्रिक एवं विद्युत संजीव कुमार ने बताया कि सीसीएल की परियोजना सहित पूरे क्षेत्र में प्रतिमाह करीब 45 लाख यूनिट बिजली की जरूरत होती है। इस प्लांट के बनने से प्रतिमाह करीब 32 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में बिजली खरीदने पर प्रतिमाह जितनी राशि खर्च होती थी, उसमें करीब 1.50 करोड़ रुपए प्रतिमाह की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा प्लांट से पिपरवार क्षेत्र में 70% बिजली की जरूरत पूरी हो जा रही है। इसके उत्पादन में प्रति यूनिट खर्च भी लगभग 2.38 रुपए पड़ रहा है। अब सीसीएल की विभिन्न परियोजना सहित आवासीय व व्यवसायिक इस्तेमाल की बिजली इसी प्लांट से मिल जा रही है। पिछले वर्ष सितंबर में केन्द्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चन्द्र दुबे ने इसका उद्घाटन किया था। प्लांट के निर्माण पर करीब 143 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। जिस कंपनी ने प्लांट का निर्माण किया है, उसी कंपनी को अगले पांच साल तक ऑपरेशन व मेंटनेंस की जिम्मेवारी दी गई है। हर माह 1.50 करोड़ की बचत… सीसीएल पिपरवार क्षेत्र अपनी जरूरत की 70 प्रतिशत बिजली खुद बना रहा इंजीनियरों ने बताया कि पिपरवार क्षेत्र के लिए डीवीसी से 5.70 रुपए प्रति यूनिट की दर से सीसीएल बिजली खरीदता है। जबकि, कारो गांव में लगे सोलर एनर्जी प्लांट से उत्पादित बिजली सीधे डीवीसी के ग्रिड में भेजी जाती है। डीवीसी कुल बिजली में 10% लॉस काटता है। 90% बिजली की कुल राशि को सीसीएल के बिजली बिल में समायोजित करता है। इससे सीसीएल को प्रतिमाह करीब 1.50 करोड़ की बचत हो रही है। एक वर्ष में 3000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य झारखंड में इस वर्ष के अंत तक सौर ऊर्जा से करीब 3000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। जेरेडा इसके लिए निजी निवेशकों को सूचीबद्ध कर रहा है। पिछले दिनों निवेशकों से प्रस्ताव मांगे गए थे। रांची के गेतलसूद डैम में 100 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग पावर प्लांट बनाया जा रहा है। करीब 800 करोड़ से बन रहे इस प्लांट से रांची को बिजली दी जाएगी। अब 10 मेगावाट का फ्लोटिंग प्लांट लगाने की तैयारी सीसीएल के अधिकारियों ने बताया कि पूरे क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत जल्द 10 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने का काम शुरू होगा। यह प्रोजेक्ट 70% फ्लोटिंग यानी पानी में और 30% जमीन पर रहेगा। बंद खदानों का भी इस्तेमाल प्लांट लगाने में किया जाएगा। यह प्लांट बनने के बाद सीसीएल की विभिन्न परियोजनाओं की बिजली जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी।


