समाज के जरूरतमंद वर्ग को सहारा देने के उद्देश्य से शहर में ‘एक उम्मीद वेलफेयर सोसायटी’ पिछले 13 वर्षों से निरंतर सेवा कार्य कर रही है। इस संस्था की नींव वर्ष 2013 में प्रधान रोशन लाल खुंगर ने रखी थी। शुरुआत में संस्था ने 30 विधवा महिलाओं को राशन उपलब्ध कराना शुरू किया। इसके साथ ही 6 निजी स्कूलों के 5-5 बच्चे यानी कुल 30 बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी भी संस्था ने उठाई। उस समय प्रधान खुंगर सरकारी और निजी स्कूलों के गरीब बच्चों के लिए विशेष रूप से दर्जी बुलाकर नाप के अनुसार स्कूल वर्दी सिलवाकर देते थे। इसके अलावा नेत्रहीन बच्चों के स्कूल में जूते और वर्दी वितरित कर संस्था ने मानवता की मिसाल कायम की। संस्था की खास बात यह है कि प्रधान रोशन लाल खुंगर और उनकी टीम किसी से चंदा नहीं मांगती। संस्था के कुल 17 पंजीकृत सदस्य हैं और सहयोग राशि सदस्य व उनके परिचित स्वेच्छा से देते हैं। बिना किसी बाहरी मदद के यह संस्था समाज में निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी की मिसाल बनी हुई है। समय के साथ जरूरतों में आए बदलाव को देखते हुए संस्था की कार्यप्रणाली में भी परिवर्तन किया गया। पहले बच्चों को कापियां और वर्दी दी जाती थीं, लेकिन वर्तमान में स्कूलों में ये सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण यह कार्य बंद कर दिया गया। अब संस्था का पूरा ध्यान केवल उन बेसहारा बुजुर्ग विधवा महिलाओं पर केंद्रित है, जिनका कोई पारिवारिक सहारा नहीं है। वर्तमान में लगभग 17 से 20 महिलाएं नियमित रूप से इस सेवा का लाभ ले रही हैं और संस्था का लक्ष्य इन्हें सम्मानजनक जीवन देना है। संस्था द्वारा हर माह दी जाने वाली राशन किट को पूरी व्यवस्था के साथ तैयार किया जाता है। इसमें 10 किलो उत्तम गेहूं का आटा, 1 किलो दाल, 1 किलो चीनी और अच्छी गुणवत्ता वाला 1 किलो घी शामिल होता है। साथ ही चाय पत्ती, नमक का पैकेट, पिसी हुई लाल मिर्च सहित सभी जरूरी मसाले दिए जाते हैं। स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए 2-2 नहाने के साबुन और 2 कपड़े धोने के साबुन भी किट में शामिल होते हैं। यह वितरण हर महीने के पहले रविवार को शक्ति नगर स्थित निवास से किया जाता है। ‘एक उम्मीद वेलफेयर सोसायटी’ केवल राशन तक सीमित नहीं है। दिवाली जैसे त्योहारों पर संस्था की ओर से महिलाओं को नए कपड़े, जूते और जुराबें भी प्रदान की जाती हैं, जिससे उनके जीवन में खुशियां बनी रहें। संस्था की चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। सहायता से पहले महिला का डेथ सर्टिफिकेट लिया जाता है और संस्था के दो सदस्य घर जाकर उसकी वास्तविक स्थिति की जांच करते हैं। केवल 60 वर्ष से अधिक आयु की पात्र विधवा महिलाओं को ही सूची में शामिल किया जाता है।


