10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए जिले में कुल 7 उड़नदस्ते गठित किए गए हैं, जिनमें से एक टीम को रिजर्व में रखा गया है। शेष 6 टीमें प्रतिदिन अलग-अलग गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों का दौरा करेंगी। लेकिन इसके लिए महज 15 हजार रुपए दिए गए हैं। जबकि गाड़ियों के डीजल पर ही 35 हजार रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे में नकल पर रोक किस तरह लगेगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जिले के 131 केंद्रों पर निगरानी के लिए केवल 15 हजार रुपए का फंड आवंटित किया है। जिले के कई केंद्र 60 से 65 किलोमीटर दूर हैं, यानी आने-जाने में 100 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करना होगा। यदि एक गाड़ी में प्रतिदिन न्यूनतम 500 रुपए का डीजल भी खर्च हो, तो परीक्षा अवधि के दौरान कुल खर्च करीब 35 हजार रुपए हो रहा है। नकल रोकने के लिए बनी इन 7 टीमों में कुल 42 अधिकारियों को तैनात किया गया है। हर टीम में 6 सदस्य शामिल किए गए हैं। पहली टीम डिप्टी कलेक्टर शिव कुमार कंवर के नेतृत्व में काम करेगी। दूसरी टीम का नेतृत्व डीईओ विजय टांडे करेंगे। तीसरी व चौथी टीम क्रमश: सहायक संचालक पी. दासरथी और वर्षा शर्मा के नेतृत्व में काम करेगी इसके अलावा अन्य टीमों में जिला स्तरीय अधिकारियों को शामिल किया गया है। पूरे परीक्षा काल के दौरान इन टीमों को कुल 70 से अधिक फेरे लगाने होंगे। आवंटित बजट से आधे दिन का दौरा करना भी संभव नहीं लग रहा है। ऐसे में दूरदराज के केंद्रों पर निगरानी करना फ्लाइंग स्क्वायड के लिए बड़ी चुनौती होगी। उड़नदस्ता टीमों की एक विशेष बैठक 19 फरवरी को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कक्ष क्रमांक 6 में आयोजित की गई है। इस बैठक में नकल रोकने की रणनीति और रूट चार्ट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। जिले में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर उत्साह और तनाव दोनों का माहौल है। 20 फरवरी से 12वीं और 21 फरवरी से 10वीं की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। कक्षा 10वीं में 131 केंद्रों पर 22,272 छात्र शामिल होंगे। परीक्षा 21 फरवरी से 13 मार्च तक होगी। वहीं, कक्षा 12वीं की परीक्षा के लिए 122 केंद्र बनाए गए हैं। 20 फरवरी से 18 मार्च तक चलेगी वाली परीक्षा में 14,922 छात्र शामिल होंगे।


