एमपी में सतपुड़ा की वादियों के बीच 1326 मीटर ऊंचे पहाड़ पर स्थित है भगवान चौरागढ़ महादेव का मंदिर। जहां विराजमान है चौरागढ़ महादेव (चोड़ेश्वर महादेव) का शिवलिंग, शिव प्रतिमा और साथ चौरा बाबा की प्रतिमा। जिसे चौरागढ़ महादेव का नाम से जाना जाता है। हर साल महा शिवरात्रि पर 10 दिवसीय मेले में लाखों श्रद्धालु भगवान महादेव के दर्शन करने पचमढ़ी पहुंचते है। महा शिवरात्रि के अवसर पर दैनिक भास्कर आपको दर्शन करवा रहा है बड़ा महादेव, जटा शंकर महादेव और चौरागढ़ बाबा के। वर्तमान में 6 फरवरी से लगे मेले में हज़ारों श्रद्धालु रोजाना दर्शन करने पहुंच है। ऊंचे पहाड़, दुर्गम रास्ते पर श्रद्धालु कंधों पर त्रिशूल लेकर मंदिर पहुंच रहे, फिर कतार लगकर श्रद्धालु आराध्य भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर रहे। भगवान को मन्नत के त्रिशूल अर्पित कर रहे है। भास्कर रिपोर्टर ने पचमढ़ी महादेव से महादेव से चौरागढ़ महादेव तक का सफर किया। भक्तों के आवागमन का यह क्रम रात्रि में भी सतत रूप से चालू है। भक्तों का जनसैलाब उमड़ गया है। जिसे देखते हुए पिपरिया और जुन्नारदेव प्रशासन मेले की व्यवस्था संभाले हुए है। दुर्गम रास्तों पर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं कर उन्हें राहत प्रदान की जा रही है। लाइटिंग महादेव से चौरागढ़ तक व्यवस्थित तौर पर हो जाने से चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश है। साथ ही पचमढ़ी से बड़ा महादेव तक मार्ग व पुराने मार्ग पर भी मरम्मत की गई है। कलेक्टर सोनिया मीना, एसपी सांई कृष्णा थोटा, सीईओ हिमांशु जैन, एडीएम राजीव रंजन पांडे, एसडीएम आईएएस आकिब खान, तहसीलदार वैभव बैरागी, एसडीओपी मोहित यादव डीएसपी संतोष मिश्रा, टीआई पदम सिंह मौर्य मेले के हर प्वाइंटों की निगरानी रख रहे है। बड़ा महादेव से चौरागढ़ तक प्रतिदिन पहुंच व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। बड़ा महादेव से 3.5 किमी और भूराभगत से 7 किमी पैदल चलते है श्रद्धालु चौरागढ़ बाबा के दर्शन के लिए दो रास्ते से पहुंचा जा सकता है। पचमढ़ी के बड़ा महादेव व छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव स्थित नांदिया भूराभगत के मार्ग है। भूराभगत के रास्ते से करीब 7 किमी का पैदल पहाड़ी पर चढ़कर रास्ता तय करना होता है। बड़ा महादेव के रास्ते से साढ़े तीन किमी का सफर पैदल ही तय करना होता है। जुन्नारदेव भूराभगत की ओर से भक्तों की लंबी लाइन लगी हुर्ह है। महादेव मेले में नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा के अलावा नागपुर विदर्भ क्षेत्र से बड़ी संख्या में महाराष्ट्री लोग आते है। श्रद्धालु महानोकामना पूरी होने पर वजनी त्रिशुल लेकर चौरागढ़ बाबा को चढ़ाने यहां लाते है।
भस्मासुर से बचने महादेव ने पचमढ़ी की पहाड़ियों पर ली शरण पचमढ़ी की शिव नगरी भी कहा जाता है। इसकी वजह महादेव के अनेक रूप और उनके गण, वाहन, शस्त्रों के स्थान है। चौरागढ़ महादेव, बड़ा महादेव, गुप्त महादेव, जटा शंकर महादेव, नंदीगढ़, निशानगढ़, नागद्वारी गुफा है। महादेव के पचमढ़ी में इन स्थानों को लेकर दो प्रकार की कितवंती है। पहली महादेव ने भस्मासुर से बचने के लिए पचमढ़ी में शरण ली थी। “महादेव ने भस्मासुर की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर उसे सिर के ऊपर हाथ रखने से भस्म होने का वरदान दे दिया। इसके बाद भस्मासुर भगवान को छूने का प्रयास करने लगा। भस्मासुर से बचने के लिए महादेव ने पचमढ़ी में ही एक जगह अपने नाग देवता, दूसरी जगह जटाओं को, तीसरी जगह चौरागढ़ में त्रिशूल, नंदीगढ़ पर्वत पर नंदी, गुप्त और बड़े महादेव की गुफा में खुद को छुपा लिया था। महादेव को संकट में देखकर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। भगवान विष्णु ने नृत्य करते हुए भस्मासुर का ध्यान भंग कर उसके सिर पर हाथ रखवा कर उसे भस्म करवा दिया। चौरागढ़ महादेव मंदिर के पुजारी देवीदास महाराज के अनुसार किवदंती है कि इसी पहाड़ी पर चौरा बाबा ने कई वर्षों तक भगवान महादेव की घोर तपस्या की थी। प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। चौरा बाबा को महादेव ने अपना त्रिशूल सौंपा। महादेव ने उन्हें वरदान दिया था कि जो भी यहां मन्नत मानेंगे, वो मनोकामना पूरी होगी। मन्नत पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाएगा। उन्होंने चौरा बाबा को वरदान भी दिया था कि यहां पर्वत चौरागढ और चौरागढ महादेव के नाम से शिवलिंग, मंदिर जाना जाएगा। तभी से इस पहाड़ी को चौरागढ़ के नाम से जाना गया। इसीलिए यहां श्रद्धालु त्रिशूल चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ से मन्नत मांगते हैं। भक्त अपने कंधों पर ले जाते हैं वजनी त्रिशूल चौरागढ़ की दुर्गम पहाड़ी पर कई भक्त कई क्विंटल वजन के त्रिशूल चढ़ाते हैं। हजारों श्रद्धालु हर साल कंधों भारी भरकम त्रिशूल लेकर पहुंचते हैं। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य प्रदेशों से लोग पहुंचते है। खासतौर से महाराष्ट्र के नागपुर, विदर्भ क्षेत्र और पांढुर्णा के बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। शिवरात्रि के दिन चौरागढ़ में सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। बड़ा महादेव, जटाशंकर, गुप्त महादेव में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भोलेनाथ के दर्शन करते हैं।
पहाड़ी पर बने अस्थाई मेडिकल,पुलिस पाइंट श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए विभिन्न मेला स्थलों चौरागढ़, नांदिया जंक्शन, अंडरपास, बीड़, बड़ा महादेव, नांदिया ग्राम, जटाशंकर इत्यादि पर मेडिकल टीम तैनात की गई है। मेले में विभिन्न स्थलों पर डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलेंडर, स्ट्रेचर और जीवनरक्षक दवाइयों के साथ मेडिकल टीम तैनात है। श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। मेले में एम्बुलेंसों भी तैनात की है, जो गंभीर मरीजों को अग्रिम उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पचमढ़ी भेजती हैं। मेले के दौरान अधिकांश मरीज हाथ-पैर दर्द, बुखार, श्वांस लेने में तकलीफ, घबराहट और डिहाइड्रेशन के कारण उपचार के लिए आ रहे हैं। आपदा प्रबंधन की टीम द्वारा भी बीमार एवं घायल श्रद्धालुओं को तत्परता से नजदीकी हेल्थ कैंप अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा जा रहा है जिससे उन्हें समय पर उपचार दिया जा सके। छिंदवाड़ा निवासी रवि जथुराया को प्रवेश द्वार पर चोट आने पर डी पी प्वाइंट मेडिकल कैंप तक स्थापना उपचार दिलाया गया। सकरी पुलिया पर एक व्यक्ति के गंभीर रूप से बीमार हो जाने पर स्ट्रेचर की मदद से डी पी पॉइंट तक तथा एंबुलेंस से पचमढ़ी अस्पताल भेजा गया।


