वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए झारखंड का बजट पेश किया गया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 1,45,400 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बजट को सामाजिक विकास पर जोर देने वाला बताया। इस बजट में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त बड़े बजट के विभागों में शिक्षा, स्वास्थ्य आदि को रखा गया है। पर बजट में डेवलपमेंट को लेकर कोई खास प्लानिंग नहीं दिखती है। सरकार दावा कर रही है कि विभिन्न तरह की योजनाओं का लाभ दे कर वह हर लोगों को मजबूत कर रही है। सरकार के इस बजट को लेकर एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार का बजट साफ बता रहा है कि उनकी नजर में डेवलपमेंट लोगों को पैसा देना है। यही वजह है कि सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी योजना मंईयां सम्मान योजना पर 13 हजार 363 करोड़ 35 लाख रुपए खर्च करने वाली है। योजना के लिए तय किया गया यह बजट योजना बजट का 14.56 प्रतिशत और कुल बजट का 9.19 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त सर्वजन पेंशन भी इसी लिस्ट में है। पैसा बांटने से नहीं होगा विकास बजट को लेकर सीनियर जर्नलिस्ट मधुकर का कहना है कि बजट उन मूलभूत बातों को पूरा नहीं कर पाता, जिसे ध्यान में रख कर अलग राज्य बना। राज्य बनने के दौरान जल, जंगल और जमीन तीन ऐसे कंपोनेंट थे, जिस पर सबसे अधिक बात होती थी। लेकिन आप देखेंगे इस बजट ये तीनों बातें अछूता हैं। बजट कुछ ऐसा होना चाहिए था जहां जल, जंगल और जमीन का एक साथ विकास होता। आंकड़े में तो हजारों करोड़ रुपए दिए गए हैं लेकिन वह किस रूप में है, इसे देखना चाहिए। वह कहते हैं कि सरकार का बजट रेवड़ी बांटने पर ज्यादा है न कि रोजगार सृजन, उद्योग लगाने और लोगों की आमदनी बढ़ाने के दूसरे माध्यम डेवलप करने पर। राज्य की आधा से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर करती है। बजट में कृषि को मिला केवल 4,587.66 करोड़ रुपए। इसमें यह पैसा किस रूप में खर्च होगा यह भी साफ नहीं है। सीएम अपने संबोधनों में मिलेट्स की बात करते हैं लेकिन बजट में मिलेट्स को लेकर कोई प्लानिंग नहीं दिखती है। लोग आत्मनिर्भर कैसे बनेंगे, इसका किसी भी विभाग के बजट में खाका स्पष्ट नहीं है। केवल पैसे बांट कर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की बात कहना समझ से परे है। राज्य का विकास पैसे बांटने से तो नहीं होने वाला। न लोगों के लिए सही राज्य के लिए वहीं सीनियर जर्नलिस्ट ज्ञान रंजन कहते हैं कि इस फ्री बीज पर बजट का बड़ा हिस्सा खर्च कर सरकार कौन से डेवलपमेंट की बात कह रही है यह समझ से परे है। सामान्य समझ से भी देखें तो कहा जाता है कि जिस पैसे को हम खर्च कर रहे हैं, उससे हमें मिल क्या रहा है। बजट में ऐसा तो कुछ नहीं दिख रहा है।
ज्ञान रंजन का कहना है कि बजट भाषण में वित्त मंत्री कहते हैं कि राज्य में 24 सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हुआ है, अब हम सामाजिक सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं। पर सवाल यह उठता है कि यह कैसी सामाजिक सुरक्षा जहां मुफ्त में चीजें दे कर पीढ़ियां बर्बाद की जा रही हैं। बजट में नौकरी, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार को लेकर कुछ भी साफ नहीं है। वह कहते हैं कि बजट भाषण में भी यह कहा गया कि राज्य के डेवलपमेंट में केंद्र सहयोग नहीं कर रही है। पर सरकार यह नहीं बता पा रही है कि चुनावी वायदे पूरे करने के लिए फ्री की योजनाओं पर पैसे बहा कर कौन का विकास हो जाएगा। आंकड़े में भी देखें तो राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। सूद अदायगी में तीन फीसदी राशि जा रही है। ऐसे में मंईयां योजना, फ्री बिजली और सर्वजन पेंशन के नाम पर पैसे बांट कर राज्य के कोष को आखिर कैसे संभाल सकेंगे।


