कामदेव साहू। महासमुंद छत्तीसगढ़ और ओडिशा सीमा पर सक्रिय प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के बीबीएम (बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद) डिवीजन ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का बड़ा निर्णय लिया है। डिवीजन के सचिव विकास ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा के नाम एक पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने डिप्टी सीएम से रेडियो पर सुरक्षा की गारंटी देने की मांग की है। सुरक्षा से जुड़ी शंकाएं दूर होने के बाद ही सरेंडर करने की बात कही है। पत्र में माओवादियों ने कहा है कि वे 2 या 3 मार्च तक सरेंडर कर सकते हैं। उनके समूह में 15 सदस्य हैं, जिनमें 3 डिवीजनल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम), 5 एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम ) और 7 पार्टी सदस्य (पीएम) हैं। इनमें से 14 छत्तीसगढ़ में बस्तर के रहने वाले हैं, जबकि एक तेलंगाना से है। माओवादी कमांडर विकास ने अपनी सुरक्षा को लेकर कुछ आशंका जताई है। उसने डिप्टी सीएम से अपील की है कि रेडियो पर उन्हें उनकी सुरक्षा की गारंटी दें। उन्होंने पत्र में लिखा है कि गृह मंत्री का आश्वासन सुनने के बाद वे बाहर आएंगे। माओवादियों ने सरेंडर की प्रक्रिया को सुगम बनाने कुछ बिंदु रखे हैं। प्रशासन और पुलिस इस पत्र की सत्यता की जांच कर रहा है। अगर यह सरेंडर सफल रहता है, तो महासमुंद और सीमावर्ती इलाकों से नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में ऐतिहासिक कदम होगा। महासमुंद में हो सकता है आत्मसमर्पण: बीबीएम डिवीजन सचिव विकास ने स्पष्ट किया है कि वे अन्य राज्य के बजाय अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ में समर्पण करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने महासमुंद जिले का चयन किया है और पूर्व माओवादी सागर के माध्यम से संपर्क साधने की बात कही है। हम 1 मार्च को फिर से संपर्क करेंगे और रिसीविंग का प्लान बनाकर बाहर आएंगे। हमें बस 1 तारीख तक का समय और सुरक्षा का भरोसा चाहिए। सर्च ऑपरेशन पर रोक: छत्तीसगढ़ में महासमुंद, ओडिशा के बलांगीर और बरगढ़ में पुलिस की कॉम्बिंग (तलाश अभियान) रोक दी जाए, ताकि वे सुरक्षित रूप से पहुंच सकें। सुरक्षा की गारंटी: पुराने केसों में फिर से फंसाकर जेल भेजे जाने की आशंका जताई है, इसके मद्देनजर समर्पण के बाद उनकी स्थिति को लेकर सरकार से स्पष्टता जाहिर करने कहा है। राजनीतिक सुझाव: सरकार अगर माओवादी पार्टी को राजनीतिक मान्यता देने और जेलों में बंद साथियों को रिहा करने जैसे कदम उठाती है, तो पूरी पार्टी सशस्त्र संघर्ष त्याग सकती है।


