150 फीट उतरा भूजल, 23 नलकूप सूखे, 4 वार्डों में रोज टैंकर से सप्लाई

भास्कर न्यूज | बेमेतरा शहर में भीषण गर्मी शुरू होने से पहले ही पेयजल संकट गहराने लगा है। नगर पालिका क्षेत्र के 23 नलकूपों का जलस्तर तेजी से गिरकर लगभग सूख चुका है, जिससे कई वार्डों में नियमित जलापूर्ति बाधित हो गई है। वार्ड क्रमांक 11, 12, 14 और 16 में प्रतिदिन टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। नगर पालिका क्षेत्र में कुल 276 पावर पंप चल रहे हैं। इनमें से 23 सिंगल पावर पंपों में पानी का स्तर इतना निचले स्तर पर चला गया है। जिसके कारण 2 से 3 अतिरिक्त पाइप डालने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। भूजल स्रोतों में आई इस गिरावट ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पीएचई विभाग के अनुसार बेमेतरा शहर में वर्तमान में भूजल स्तर लगभग 150 फीट तक पहुंच चुका है, जो आने वाले दिनों में और नीचे जा सकता है। सिंघोरी और पिकरी वार्ड में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहां बीते बरसात सीजन से ही टैंकर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। भूजल गिरने से हैंडपंप और पावर पंप अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं दे पा रहे हैं। ग्राम अमोरा और बेमेतरा शहर में प्लांट स्थापित शहर में शिवनाथ नदी से मीठे पानी की आपूर्ति के लिए लगभग 54 करोड़ रुपए की लागत से इंटेकवेल और ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया था। ग्राम अमोरा और बेमेतरा सिटी में प्लांट लगने के बावजूद आज तक पूरे शहर को नियमित मीठे पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। गर्मी के मौसम में पीएचई विभाग पुरानी पानी टंकियों को जोड़कर आपूर्ति की योजना बनाता है, लेकिन भीषण गर्मी के दौरान नियमित सप्लाई बनाए रखना चुनौती बना रहता है। नई पानी टंकियों का निर्माण अब तक नहीं हो सका है, जिससे व्यवस्था पुराने ढांचे पर ही निर्भर है। शहर के कई वार्डों में 30 से 35 वर्ष पूर्व बिछाई गई पाइपलाइन से ही आज भी पानी की सप्लाई की जा रही है। सड़क चौड़ीकरण और सीसी रोड निर्माण के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त और जर्जर हो चुकी है। आए दिन लीकेज और मरम्मत का काम चलता रहता है। सरकार की ओर से पूरे शहर में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए अब तक पर्याप्त राशि स्वीकृत नहीं की गई है। परिणामस्वरूप पेयजल आपूर्ति पुराने सिस्टम से ही की जा रही है, जिससे दबाव और वितरण दोनों प्रभावित होते हैं। 35 साल में बढ़ी आबादी नई टंकियों की जरूरत पिछले 35 वर्षों में शहर की आबादी में वृद्धि हुई है, लेकिन जनसंख्या के अनुपात में नई पानी टंकियों का निर्माण नहीं हो पाया। वर्तमान में पुरानी टंकियों के भरोसे ही आपूर्ति की जा रही है। कई स्थानों पर 5 एचपी के पावर पंप से सीधे घरों तक पानी पहुंचाया जाता है, ताकि दबाव बना रहे। नगर की आबादी और गिरते जलस्तर को देखते हुए कम से कम चार नए स्थानों पर पानी टंकी निर्माण की आवश्यकता है। पिछले पांच वर्षों से गर्मी के मौसम में हर बार गंभीर पेयजल संकट की स्थिति बनती है, इसके स्थायी समाधान की दिशा में कार्ययोजना अब तक नहीं बनी है।

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