राजधानी में नगर निगम एक होने के बाद भी शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। बाजारों और कॉलोनियों में लगी हजारों स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार केवल कागजों में ही शिकायतों का निस्तारण दिखा रहे हैं। नतीजा यह है कि शहर की करीब 135 से अधिक कॉलोनियां अंधेरे में डूबी हुई हैं, जिससे चोरी और असामाजिक गतिविधियों का खतरा बढ़ गया है। निगम क्षेत्र में करीब 1 लाख 75 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं। इनमें से 1663 लाइटें कई महीनों से खराब पड़ी हुई हैं। हालात यह है कि खराब लाइटों की 431 शिकायतें निगम में दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर जगहों पर लाइटें ठीक नहीं की गईं। कई जगहों पर तो एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी अंधेरा बना हुआ है। निगम ने स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव का काम ठेकेदारों को दे रखा है। इनमें से करीब 35 हजार लाइटें ठेकेदारों की ओर से लगाई गई हैं, जिनका मेंटेनेंस भी उन्हें ही करना है। इसके बावजूद ठेकेदार मरम्मत करने के बजाय मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने लाखों रुपए का भुगतान उठा रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब लाइटें परकोटे के इलाकों में हैं, जहां करीब 592 स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हुई हैं। इसके अलावा सांगानेर, प्रताप नगर, मानसरोवर, वैशाली नगर, झोटवाड़ा, निवारू रोड, हसनपुरा, सोढ़ाला, अजमेर रोड, जगतपुरा, आगरा रोड, खोनागोरियान और जयसिंहपुरा खोर सहित कई इलाकों में करीब 700 लाइटें खराब बताई जा रही हैं। अंधेरा होने के कारण कई इलाकों में चोरी की घटनाएं बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई मामलों में शिकायतों को कागजों में निपटा दिया जाता है निगम ने हर जोन में खराब लाइटों को ठीक करने के लिए ठेकेदार नियुक्त किए हैं, लेकिन कई मामलों में शिकायतों को कागजों में ही निपटा दिया जाता है। प्रताप नगर निवासी हेमेंद्र सैनी ने बताया कि उन्होंने 10 दिन पहले खराब लाइटों की शिकायत दर्ज कराई थी। तीन दिन बाद कंट्रोल रूम से संपर्क किया तो शिकायत का निस्तारण बताया गया, जबकि मौके पर लाइटें अब भी बंद हैं। इसी तरह वैशाली नगर भट्टा बस्ती निवासी हमीद ने बताया कि वे पिछले 15 दिन से लाइटें ठीक कराने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।


